Janiye adarak ke chamatkarik aushdhiya guno ke bare me

 अदरक का सामान्य परिचय --
आज संपूर्ण भारतवर्ष में या यूं कहिए कि संपूर्ण विश्व में ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं होगा, जो अदरक के बारे में नहीं जानता होगा। परंतु बहुत से लोग अदरक के औषधीय गुणों के बारे में नहीं जानते हैं।
 अदरक एक साधारण सी दिखने वाली वनस्पति ही नहीं है वरन यह बहुत सारे रोगों की एक महौषधि भी है ।
अदरक भोजन को स्वादिष्ट व सुपाच्य बनाने के लिए आमतौर पर हर घर में उपयोग किया जाता है। वैसे तो यह भारत के सभी प्रदेशों में पैदा होता है लेकिन अधिकांश उत्पादन केरल राज्य में किया जाता है ।यह सूखी और गीली दोनों अवस्थाओं में मिलता है। सूखी अवस्था में इसे  सोंठ या सुंठी तथा गीली अवस्था में इसे अदरक के नाम से जाना जाता है। गीली मिट्टी में दबाकर रखने से यह अगले काफी समय तक ताजा बना रहता है ।
इसका कंद हल्का पीलापन लिए ,बहुखंडी और सुगंधित भी होता है ।

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इसके विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नाम भी हैं ।जैसे-संस्कृत में इसे आद्रक, हिंदी में अदरक, मराठी में आले ,गुजराती में आदु, बंगाली में आदा, अंग्रेजी में जिंजर (ginger) तथा लैटिन में जिजिबर ऑफिसनेल  कहते हैं ।

अदरक के औषधीय गुण--
 अदरक में अनेक औषधीय गुण होने के कारण आयुर्वेद में इसे महा औषधि माना गया है ।यह गरम,तीक्ष्ण,  भारी, मल भेदक, पाक में मधुर, भूख बढ़ाने वाला ,पाचक, चरपरा, रुचिकारक, त्रिदोष मुक्त यानी वात पित्त और कफ नाशक होता है ।

अदरक का रासायनिक संरचना--
 वैज्ञानिक मतानुसार अदरक की रासायनिक संरचना में 80% भाग जल होता है, जबकि सोंठ में इसकी मात्रा लगभग 10% होती है। इसके अलावा स्टार्च 53 %, प्रोटीन 12. 4% ,फाइबर 7.2% ,राख 6.6%, तात्विक तेल (एसेंशियल आयल) 1.8% तथा औथियोरेजिन मुख्य रूप से पाए जाते हैं ।
सोंठ में प्रोटींस ,नाइट्रोजन ,अमीनो एसिड्स, स्टार्च, ग्लूकोज ,सुक्रोज ,फ्रक्टोज, सुगंधित तेल ,ओलियोरेसिन, जिनजीबरीन,  रैफिनीस, कैल्शियम,विटामिन बी और सी,प्रोटिथीलिट एन्जाइम्स और लोहा भी मिलते हैं।प्रोटिथीलिट एन्जाइम के कारण ही सोंठ कफ हटाने व पाचन संस्थान मे विशेष गुणकारी सिद्ध हुई है।

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 अदरक के हानिकारक प्रभाव --
अदरक की तासीर गर्म होने के कारण जिन्हें ग्रीष्म ऋतु में गर्म प्रकृति का भोजन न पचता हो, कुष्ठ ,पीलिया, रक्त पित्त, ज्वर , शरीर से रक्त स्राव की स्थिति  जैसी बीमारियों में इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
 अदरक का प्रयोग विभिन्न रोगों में किया जाता है जो कि निम्न प्रकार से हैं-
 उल्टी में -अदरक का रस प्याज के रस के साथ मिलाकर प्रयोग किया जाता है।
 हिचकी में- सभी प्रकार की हिचकियों में अदरक की छोटी डली मुंह मे रखकर चूसा जाता है।
 पेट के दर्द में- अदरक और लहसुन को मिलाकर प्रयोग करते हैं।
 मुंह की दुर्गंध के लिए- अदरक का रस बहुत ही फायदेमंद होता है ।
जोड़ों के दर्द के लिए- जोड़ों के दर्द में  भी अदरक बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ है ।
साथ ही साथ दांत दर्द,  खांसी, सर्दी जुकाम ,स्वरभंग ,कान दर्द ,लकवा, पेट और सीने की जलन ,वात ,कमर का दर्द एवं बुखार इत्यादि रोगों में भी विभिन्न औषधियों के साथ अदरक का प्रयोग किया जाता है।

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