Ashwagandha ,a powerful remedy of ayurved

  अश्वगंधा का सामान्य परिचय -
अश्वगंधा का पौधा आमतौर पर देश के सभी राज्यों में पैदा होता है ,लेकिन मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के मनासा तहसील में इस की पैदावार सर्वाधिक होती है ।
आयुर्वेदिक ग्रंथ भावप्रकाश के अनुसार अश्वगंधा में घोड़े के पेशाब जैसी गंध आने के कारण इसका नाम अश्वगंधा  ,बाजिगंधाा पड़ा है ।जैसे-जैसे इसकी जड़ सूखती जाती है, वैसे-वैसे इसकी गंध दूर हो जाती है ।इसका झाड़ीदार पौधा दो से 3 फुट लंबा होता है ,लेकिन इसकी जड़ ही औषधि में प्रयुक्त होती है ।
जड़ ऊपर से मटमैली ,अंदर से सफेद ,कठोर, मोटी पतली और चार से 8 इंच लंबी होती है ।जड़ को छाया में सुखाकर प्रयोग में लाया जाता है ।पौधे पर पुष्प प्रायः 5 के चूड़ाकार गुच्छे में पीले और हरे रंग के लगते हैं ।फल 2 से 3 इंच के गोलाकार रसभरी के समान लाल रंग के होते हैं ।इसके बीज पीले रंग के छोटे ,चपटे और चिकने होते हैं ।

Ashwagandharishta roots


अश्वगंधा के विभिन्न भाषाओं में नाम-
 संस्कृत में अश्वगंधा को अश्वगंधा कहते हैं, हिंदी में अश्वगंधा ,मराठी में असगंध ,गुजराती में आसन्ध, बंगाली में अश्वगंधा ,अंग्रेजी में विंटर चेरी(winter cherry) ,लैटिन में विदैनिया सोम्नीफेरा (with ania somnifera)कहते हैं ।
अश्वगंधा के गुण-
भारतीय चिकित्सा पद्धति के अनुसार अश्वगंधा को सदियों से एक सुप्रसिद्ध औषधि माना गया है ,जो मनुष्य की शारीरिक व मानसिक प्रक्रिया के सुचारु रुप से चलाने में मुख्य भूमिका निभाता है।
अश्वगंधा एक बलकारक ,पुष्टिकारक और शारीरिक सौंदर्य बढ़ाने वाली जड़ी है ।जिसके बाजीकरण गुणों की प्रधानता के कारण इसकी जनरल टॉनिक के रूप में भी सभी चिकित्सा पद्धतियों में मान्यता प्रदान की गई है ।
आयुर्वेदिक मतानुसार अश्वगंधा हल्की ,कटु ,मधुर रसयुक्त ,तासीर गर्म ,स्निग्ध ,कफ वात शामक ,अत्यंत वीर्यवर्धक ,बलवर्धक रसायन ,कसैली ,कड़वी, कांति जनक एवं पुष्टिकारक है ।साथ ही कृमि ,सूजन, कण्डू ,व्रण, कास,श्वास,क्षय,  श्वेत कुष्ठ ,आम वात नाशक जड़ है ।
इसके अलावा मांस वर्धक ,स्तन्य वर्धक ,गर्भधारण में सहायक और अवसादक भी है ।इस  जड़ी को लगातार 1 वर्ष तक सेवन करने से शरीर निर्विकार बन जाता है ।
यूनानी मतानुसार यह जड़ी तीसरे दर्जे कि उष्ण है ।स्त्री पुरुष की काम शक्ति बढ़ाने और कटिशूल को दूर करने में यह बहुत प्रभावी है ।वीर्य के पतलेपन को यह दूर करती है ।
 आधुनिक खोजो ने सिद्ध किया है कि अश्वगंधा तनाव दूर करने के साथ-साथ शरीर को अनुकूलन शक्ति प्रदान करता है ।अश्वगंधा के सेवन से शरीर में आंतरिक एवं बाह्य तनावों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है ।
यद्यपि अश्वगंधा के सभी भाग औषधीय गुणों से युक्त हैं परंतु इसकी जड़ों में अनेकों प्रभावकारी प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं ,जिनमें प्रमुख हैं -बिथेनोलाइड्स एवं विथाफेरिन ए  जो तनाव प्रतिरोधी क्षमता सुदृढ़ बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Also read some useful articles

Janiye adarak ke chamatkarik aushdhiya guno ke bare me

Janiye kyon logo ko ho jati hai Allergy

Janiye tetanus kaise hota hai

अश्वगंधा के विभिन्न रोगों में उपयोग-
 अश्वगंधा का विभिन्न रोगों में उपयोग निम्न प्रकार से है
1-आधे सिर के दर्द में
2-श्वेत प्रदर में
3-अनिद्रा व याददाश्त की कमी में
4-स्तनों में दूध वृद्धि व स्तनों का पुष्टिकरण में
5-बच्चों के दुबलेपन  में
6-कमर दर्द में
7-गर्भधारण के लिए
  8-वीर्य वृद्धि हेतु
 9-बादी बवासीर के लिए
  10-हृदय पीड़ा में
11-पौष्टिक, बलवर्धक ,वात नाशक योग इत्यादि
Previous
Next Post »