Kyon ho jati hai sharir me sujan

शरीर पर सूजन आ जाना -
यह एक आम तौर पर दिखने वाला लक्षण है ।सूजन पूरे शरीर पर भी आ सकती है अथवा शरीर के किसी एक भाग पर भी।
 शरीर पर सूजन अनावश्यक रुप से द्रव के एकत्रित हो जाने से हो सकती है अथवा त्वचा के नीचे अनावश्यक रूप से tissues की बढ़त से ।
पहले स्थिति में सूजन वाले भाग को दबाकर देखने पर वहां गड्ढा सा बन जाता है ,जबकि दूसरी स्थिति में सूजन ठोस होती है।
 वास्तव में सूजन अपने आप में कोई रोग ना होकर बहुत से रोगों पर एक लक्षण मात्र है और इसीलिए चिकित्सक इन रोगियों से मूल कारण को मालूम करने के लिए कुछ अन्य मौजूद लक्षणों की भी जानकारी करते हैं।
जैसे -मूत्र की मात्रा कम तो नहीं है ?
क्या सांस फूलती है ,कहीं से खून तो नहीं बह रहा ,भोजन मे प्रोटीन युक्त पदार्थों का समुचित समावेश है अथवा नहीं ,रोगी मद्यपान तो नहीं करता, उसे भूख कम तो नहीं लगती, मल में कीड़े तो नहीं आते, कब्ज तो नहीं रहती है ।रोगी स्टीरायड दवाओं का सेवन तो नहीं कर रहा इत्यादि।
 इसके लिए अन्य शारीरिक परीक्षण भी कराए जाते हैं। ।
 सूजन का कारण -
शरीर पर सूजन आने के मुख्य कारण और उनकी पहचान कुछ इस प्रकार से है -
1-रक्त और प्रोटीन की कमी से सूजन
 गरीबी और अज्ञानता के कारण भोजन में प्रोटीन पदार्थों का समुचित समावेश ना होना ,शरीर मे आंतो  से चिपके हुक वर्म कीड़े द्वारा रक्त चूसते रहने से ,पेप्टिक अल्सर या कैंसर से लगातार धीरे-धीरे रक्त रिसते  रहने से, बवासीर के मस्सों से रक्त बहने से, गुर्दों के कई रोगों में मूत्र में प्रोटीन निकलते रहने से तथा लीवर के पुराने रोग cirrhosis में प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में न बनने से शरीर में रक्त एवं प्रोटीन की कमी हो जाती है, जिससे शरीर पर  सूजन आ जाती है।
2- लीवर रोगों से सूजन हो जाना-
 वायरल हेपेटाइटिस( पीलिया) का यदि त्वरित एवं समुचित उपचार न किया जाए तो यह  chronic stage में पहुंचकर लीवर कोशिकाओं को नष्ट करता रहता है, जिससे खतरनाक पुराना रोग cirrhosis हो जाता है, जो लगातार बहुत वर्षों तक अधिक मात्रा में मद्यपान करने से भी हो सकता है ।एक खास प्रकार की cirrhosis हमारे देश के छोटे बच्चों में देखने को मिलती है, जो शायद पीतल के बर्तन में उबला दूध पिलाने से हो जाती है।
 लक्षण जो देखने को मिलते हैं
Cirrhosis का रोग जब अधिक बढ़ जाता है तो पेट की झिल्ली में द्रव एकत्रित हो जाने से रोगी का पेट फूला नजर आता है,पेट पर शिराएं उभरी  दिखाई देते हैं, तिल्ली का आकार बढ़ जाता है, खून की उल्टी हो सकती है और अंदर खून बनने के कारण टट्टी कोलतार जैसे चिकनी एवं काली आती है।
Cirrhosis से ग्रसित  लीवर शरीर के लिए आवश्यक प्रोटीन (एल्ब्यूमिन) नहीं बना पाता ,जिससे पैरों पर सूजन आ जाती है।
 उपचार -
ऐसे रोगी को भोजन में नमक कम और कार्बोहाइड्रेट्स (गेहूं-चावल, ग्लूकोज ,चीनी) के साथ ही प्रोटीन पदार्थ (दाल ,अंडे की सफेदी ,दूध )भी पर्याप्त मात्रा में  दें।
गुर्दों  के रोगों से सूजन -
गुर्दे शरीर के विषैले पदार्थों को मूत्र के जरिये बाहर निकालने के साथ-साथ रक्तचाप तथा शरीर में पानी ,सोडियम ,पोटेशियम, अम्लता तथा क्षार का भी नियमन करते हैं। गुर्दों पर विपरीत प्रभाव डालने वाले एक खास प्रकार के जीवाणु स्ट्रेप्टोकोकस से जब बच्चों का गला खराब हो जाए अथवा त्वचा का संक्रमण हो जाए तो उचित उपचार के अभाव में यह जीवाणु एक विषैला प्रभाव छोड़ते हैं जो रक्त द्वारा गुर्दों में पहुंचकर उनमें सूजन उत्पन्न कर देते हैं।
  फाइलेरिया में होने वाली सूजन -
इस रोग में सूजन प्रायः एक पैर या एक हाथ में होती है ,जो मच्छरों के काटने से फैलने वाले परजीवी कीड़े से उत्पन्न होती है। इस प्रकार की सूजन को उंगली से दबाने पर गड्ढा पड़ सकता है ।जब कीड़े लिंफ नलिकाओं को अवरुद्ध कर देते हैं ,तो हाथ पैरों पर सूजन तथा हाइड्रोसील जैसे लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं। लिंफ नलिकाओं  फट जाने पर पेट की पेरिटोनियम झिल्ली में दूध जैसा सफेद द्रव एकत्रित हो जाने से कुछ रोगियों का पेट भी फूल जाता है। प्रारंभिक अवस्था में समुचित उपचार न लेने पर फाइलेरिया के बार बार आक्रमण होने से पैर बहुत अधिक फूल सकता है ,जिसे फीलपांव की संज्ञा दी जाती है ।फाइलेरिया से बचाव के लिए मच्छरों से बचने के सभी उपाय करने आवश्यक हैं।
 हृदय फेल्योर में होने वाली सूजन -
हृदय फेल्योर के रोगी में सूजन मुख्यतः पैरों पर दिखाई देती है ।जो लोग कुर्सी पर बैठकर अपना कार्य करते हैं ,वह प्रायः शाम के समय पैरों पर सूजन आने की शिकायत करते हैं। जो रोगी बिस्तर पर लेटे रहते हैं,, उनके पीछे कमर से निचले हिस्से में सूजन देखी जा सकती है। जब रोग अधिक बढ़ जाता है तो पेट की पेरिटोनियम झिल्ली में द्रव एकत्रित हो जाने से पेट भी फूला नजर आता है और लीवर तथा तिल्ली का आकार भी काफी बढ़ जाता है ।फेफड़े की प्लूरा झिल्ली के बीच में द्रव एकत्र हो सकता है।
 हृदय फेल्योर के कुछ रोगियों में रक्त नलिकाओं से    द्रव निकलकर अचानक फेफड़ों में भरने लगता है जिससे उनको सांस लेने में अत्यंत कठिनाई होती है ।यह स्थिति बहुत खतरनाक होती है।हृदय फेल्योर के रोगी को नमक कम मात्रा  में दें एवं धूम्रपान, मद्यपान का सेवन ना करने दें।
 शरीर में सूजन होने के अन्य भी कई कारण हैं जैसे -1-फेफड़े के रोग में शरीर पर सूजन हो जाती है।
 2-थायराइड हार्मोन की कमी से भी शरीर पर सूजन हो जाती है ।
3- मासिक धर्म के समय भी कुछ महिलाओं को सूजन हो जाती है।
4- गर्भवती महिलाओं  को भी कभी कभी  शरीर में सूजन हो जाती है ।
5-विटामिन बी1 की कमी से भी शरीर में सूजन हो जाती है और 
6-कभी-कभी कुछ औषधियों के दुष्प्रभाव से भी शरीर में सूजन हो जाती है।
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