Kaise ho jata hai Infectious hepatitis,janiye iske Karan aur treatment

 What is Infectious hepatitis-
यह एक विषाणु (Aअथवा IH  )द्वारा उत्पन्न होने वाला रोग है ,जो मल संदूषण के द्वारा फैलता है। इसका प्रसार भारत के अनेक नगरों में होता है ।इसे "संक्रामक पीलिया" या केवल "पीलिया" भी कहते हैं ।वास्तविक पीलिया जिसे पांडू या कामला कहते हैं इससे बिल्कुल भिन्न रोग है और इसमें सूक्ष्म जीवों की कोई भूमिका नहीं होती है।
 याद रखें वैसे तो पीलिया कई प्रकार का होता है और उसके कारण भी भिन्न-भिन्न होते हैं ,जैसे -पित्त नलिका में फंसी पथरी से पीलिया, लीवर कैंसर से पीलिया ,पैंक्रियाज के कैंसर से पीलिया, लाल रक्त कणों के जल्दी-जल्दी नष्ट होने से पीलिया, और कुछ दवाओं के कुप्रभाव से पीलिया ।लेकिन इसका सबसे मुख्य कारण वायरस विषाणु द्वारा होने वाली लीवर की सूजन हेपिटाइटिस है ।
संक्रामक पीलिया (infectious hepatitis)
बहुत अधिक प्रचलित रोग है। इसके अनेक रोगी अक्सर देखने को मिलते हैं क्योंकि यह एक वायरस जनित रोग है तथा एक से दूसरे बहुत से लोगों को हो सकता है।
यह रोग छोटे बच्चों तथा युवाओं में अधिक देखा जा सकता है ।
जब रोगी की आंखें ,त्वचा और मूत्र का रंग पीला हो जाता है तो इसकी पहचान में कठिनाई नहीं होती है ।परामर्श के लिए आने वाले अधिकांश रोगी कुछ अन्य लक्षणों की भी प्रारंभ में शिकायत करते हैं जिससे वायरल हेपेटाइटिस को बहुत प्रारंभिक स्टेज पर ही पहचाना जा सकता है जिससे उपचार में बहुत सफलता मिलने के साथ-साथ जटिलताओं से भी बचा जा सकता है ।
गर्मी आने के साथ ही पीलिया का मौसम भी आने की तैयारी करने लगता है ,गर्मियों का मौसम प्रारंभ होते ही कुछ रोगों के कीटाणु अधिक सक्रिय हो जाते हैं इनसे कई प्रकार की बीमारियां होने का भय रहता है। जैसे -पीलिया, टाइफाइड, पेचिश एवं पेट से संबंधित अन्य रोग ।
इंफेक्शन से कौन कौन से रोग होते हैं इसकी जानकारी के लिए नीचे का लिंक अवश्य पढ़ें

Infection se hone wale diseases


इस रोग में रोगी का यकृत (Liver)प्रभावित हो जाता है। रोग के कीटाणु दूषित भोजन, गंदे पानी ,बाजार में बिकने वाली चाट तथा कटे हुए फलों एवं गन्ने के रस द्वारा शरीर में पहुंचकर हानि पहुंचाते हैं ।
बाजार में बिकने वाली बर्फ से  भी यह रोग प्रसारित होता है ।
स्कूल ,कॉलेज ,छात्रावास ,शिविर ,सैनिक वास आदि स्थानों में  यह रोग अधिक होता है ।
दूषित खाद्य  पेय पदार्थों से संक्रामक रूप में फैलने का स्वभाव इसमें अधिक होता है ।अतः जहां पर बालक ,युवा तथा पुरुष संख्या में अधिक इकट्ठे होते हैं वहां पर यह जनपदों ध्वंस के रूप में प्रकट होता है ।युद्ध स्थल पर यह रोग महामारी के रूप में फैलता है ।

infectious hepatitis रोग के प्रमुख कारण -
यह एक विषाणु( AअथवाIH) द्वारा उत्पन्न होता है जो मल संदूषण के द्वारा फैलता है ।
यदि दूषित  रूधिर का आधान (Blood transfusion) किया जाता है, तो भी संक्रमण फैल सकता है ।
यकृत शोथ से पीड़ित व्यक्तियों के निकट संपर्क से भी रोग फैल सकता है ।
जानपदिक अवस्थाओं में भी पानी, दूध आदि से भी रोग का प्रसार होता है।
 रोग का वायरस रोगी के पाखाने में मिलता है। मुख्यतः पीलिया लीवर की सूजन से होती है ,जिसे 'हेपेटाइटिस' कहते हैं ।
हेपेटाइटिस एक संक्रामक रोग है ।
लीवर में सूजन वायरस विषाणु से होती है ।
Infectious hepatitis रोग के लक्षण -
शीत लगकर ज्वर ,सिर दर्द एवं व्याकुलता  यह तीनों लक्षण रोगी में आरंभ से ही उपस्थित मिलते हैं।
 कुछ दिनों से लेकर 2 सप्ताह तक के समय में कामला में वृद्धि होती है ।
अरुचि  एवं वमन अतिसार
जैसे-जैसे यकृत बढ़ता जाता है ,वैसे -वैसे उसके ऊपर के भाग में पीड़ा होती है ।
मुत्र में पित्त की उपस्थिति एवं आंखों के हलके पीलेपन से प्राप्त होती है।
 पित्त वाहिनी का अवरोध जैसे-जैसे बढ़ता जाता है ,पीलिया गहरा होता जाता है।
 पुरीष अधिक मटमैला एवं मूत्र अधिक काला होने लगता है ।इस अवस्था में यकृत अधिक स्पर्श लभ्य हो जाता है ।
कुछ समय के उपरांत रोगी में सुधार होने लगता है ।भूख लगने लगती है ,मूत्र का रंग बदलने लगता है ,पीलिया कम होने लगता है और। Liver अपने स्वभाविक। आकार मे आने लगता है ।
3 से 7 सप्ताह में अधिकांश रोगी धीरे-धीरे रोग मुक्त हो जाते हैं।
 Infectious hepatitis का प्राकृतिक उपचार -खाने पीने में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।।
 यदि रोग के व्यापक रूप से फैलने की संभावना हो अथवा यदि वह व्यापक रूप से फैल चुका हो तो पानी उबालकर तथा छानकर पीना ही अधिक उत्तम होता है।
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 कच्चे दूध दूध का सेवन न करें ।
जहां तक संभव हो घर का ही ताजा ,हल्का एवं सुपाच्य भोजन करें ।
अन्य पेय पदार्थ गन्ने और मौसम्मी का रस, ठंडाई ,शरबत आदि स्वछता से बने और रखे हों तभी ग्रहण करें।
 खाने पीने की वस्तुएं धूल और मक्खियों से बचाकर रखें ।
सब्जियों को भलीभांति धोकर ही प्रयोग करें ।
बाजार में बिना ढके कटे सड़े-गले फल न खाएं भोजन ग्रहण करने से पहले या परोसने से पहले हाथ भली-भांति धोए ।
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Apna health kaise banaye

खून की कमी होने पर यदि खून चढ़ाना आवश्यक हो तो स्वस्थ व्यक्ति का ही खून चढ़ाएं।
 शरीर की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें ।
रोगी को झाड़-फूंक से कोई लाभ नहीं होता झाड़ फूंक न करवाएं।
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