Kyun ho jata hai Diabetes Mellitus,janiye iske Karan aur treatment

What is diabetes Mellitus
 मधुमेह एक ऐसा रोग है ,जिसमें रक्त के अंदर ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है। इसमें इंसुलिन की उत्पत्ति कम होती है एवं कार्बोहाइड्रेट्स का परिपाचन ठीक से नहीं होता है ।
यह स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों में अधिक मिलता है ।डायबिटीज का रोग आज विश्व के विकासशील तथा विकसित देशों में समान रुप से पैर पसार रहा है ।विकसित देशों में तो यह पांचवी ऐसी बीमारी है जिस से मरने वालों की संख्या सर्वाधिक है। जिस गति से यह बीमारी बढ़ रही है उससे लगता है कि बीमारी से मरने वालों में सर्वाधिक संख्या इसी के रोगियों की ही है ।
डायबिटीज दो कारणों से होता है -
1-जब शरीर में इंसुलिन नहीं बनता है 
2-जब शरीर में इंसुलिन की कार्य शक्ति में कमी हो जाती है ।
जब शरीर में ग्लूकोज का उचित रूप से उपयोग नहीं हो पाता तो बढ़ी हुई शुगर रक्त में चली जाती है ।इस स्थिति में रक्त की तुलना शीरे से की जा सकती है ।शुगर के अनुप्रयोग के कारण शरीर कमजोर होता चला जाता है साथ ही साथ रक्त में शुगर भी मौजूद होने के कारण यह अन्य बीमारियों को अपनी ओर आकर्षित करती है। डायबिटीज के रोगी में होने वाले मुख्य खतरे निम्न प्रकार है -
1-मोतियाबिंद
2-हाई ब्लड प्रेशर
3- किडनी फेल हो जाना
4-इससे हृदय रोग का खतरा 2 से 3 गुना बढ़ जाता है 5-TB होने की संभावना बढ़ जाती है
मधुमेह एक अतिव्यापक रोग है ।100 व्यक्तियों के पीछे एक में यह अवश्य मिलता है।
 हम लोग जो कुछ मीठा पदार्थ खाते हैं, वह शर्करा मे बदल कर शरीर के ताप  को बढ़ाने का कार्य करते हैं। इसके विपरीत इस रोग में शर्करा अच्छी तरह न पचकर ,बिना किसी परिवर्तन के ,लगभग उसी हालत में पेशाब के साथ बाहर निकल जाती है ।इसमें पेशाब बहुत अधिक होता है और उसमें चीनी भी मिली होती है ।प्रारंभ में प्यास अधिक लगती है, मुंह सूख जाता है, दांत और मसूड़े खराब होकर पाचन क्रिया बिगड़ जाती है ।कार्बंकल और फोड़ा निकल आता है ।मूत्र  की जांच करने पर  शर्करा की उपस्थिति मिलती है ।संक्षेप में कहा जाय तो रक्त में शर्करा को संतुलित रखने की क्रिया  भली-भांति संपादित नहीं होती है तब मधुमेह रोग होता है ।
डायबिटीज के कारण --
1--मधुमेह का रोग प्रायः 50 से 70 वर्ष के बीच के उच्च वर्ग के  शिक्षित , बैठकर काम करने वाले ,अधिक मात्रा में आहार लेने वाले तथा मोटे व्यक्तियों में अधिक होते देखा जाता है। इसके विपरीत निर्धन तथा श्रम करने वाले एवं ग्रामवासियों में प्रायः नहीं मिलता है ।
2-यह अधिक मानसिक परिश्रम करने, चिंता ,उत्तेजना ,चोट एवं कुछ संक्रामक रोग जैसे -डिप्थीरिया ,मलेरिया, फ्लू, टांसिलाइटिस आदि के बाद भी कभी-कभी होते देखा गया है ।
3-अधिक मीठा पदार्थ, शक्कर या अत्यधिक मिठाईयां बहुत दिनों तक खाते रहने से यह रोग हो जाता है ।
4- नशीली वस्तुओं के अधिक सेवन से
5-यकृत या क्लोम ग्रंथियों के कार्यों में कमी आने से 6-मोटापा इस रोग का सबसे बड़ा कारण है ।इससे रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ती है ।
7-इस रोग की निर्बलता पैतृक परंपरा से भी आती प्रतीत होती है ।यह देखा गया है कि यदि माता पिता दोनों में मधुमेह रोग रहा है तो उनकी संतान में भी मधुमेह होता देखा गया है।
8- कभी-कभी नाड़ी मंडल की विक्षोभशीलता भी इस रोग का कारण हो सकती है अर्थात चिंता की अधिकता से भी यह रोग हो सकता है।
 इसके अन्य कारण-
1- इंसुलिन रिसेप्टर की गड़बड़ी होने पर
2-पैंक्रियाज की सिकुड़न से व उसकी डक्ट्स  मे स्टोन बनने से
3-अग्नाशय का कैंसर होने से
4-शरीर में हारमोंस में बदलाव होने से
5-संक्रमण होने से
6-अधिक मात्रा में शारीरिक श्रम न करने से
7-अधिक मानसिक तनाव होने से
8-बहुत ज्यादा खाने और मोटापे से वयस्कों में मधुमेह हो सकता है ,बहुत कम खाने से भी मधुमेह में हो सकता है
9-दवाइयों के बुरे प्रभाव से जैसे मूत्र ज्यादा लाने वाली कुछ औषधियां व गर्भ निरोधक औषधियां
 10-भारत में डायबिटीज 45 से 55 वर्ष की आयु में अधिक पाया जाता है ,स्त्रियों की  अपेक्षा पुरुषों में ज्यादा मिलता है ।
मधुमेह से पीड़ित माता-पिता के बच्चों में  यह रोग होने की संभावना थोड़ी ज्यादा रहती है ।
माता-पिता में किसी एक को मधुमेह होने  पर इसकी संभावना थोड़ी कम हो जाती है ।
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डायबिटीज के लक्षण -
1-डायबिटीज का रोग धीरे-धीरे अज्ञात रूप में होता है ।रोगी को सबसे पहले बहुमुत्र(polyurea )की शिकायत होती है ।दिन भर में बार-बार तथा मात्रा में अधिक (2-3लीटर) मूत्रआता है ।
2-जल के अधिक निकल जाने से रोगी को प्यास अधिक लगती है ।
3-35% रोगियों में शर्करा के अधिक निकल जाने से भूख अधिक लगती है, किंतु धीरे धीरे भूख मंद पड़ती जाती है ।
4- 40%  रोगी बढ़ती हुई अशक्ति एवं घटते हुए भार  की शिकायत लेकर आते हैं ।शरीर कृश होने से स्वल्प श्रम  से ही शरीर में थकावट आ जाती है ।
5-शरीर से शर्करा व जल निकल जाने से  कमजोरी व किटोसिस के लक्षण मिलते हैंं।
6- मसूड़े फूल जाते हैं  और उनसे रक्त आने लगता है 7-मूत्र का आपेक्षिक गुरुत्व 1060 से ऊपर हो जाता है ।
8-त्वचा में शुष्कता के कारण तथा उसका पोषण भली-भांति न होने से उसमें शुष्कता  तथा रूक्षता का लक्षण होता है।
9- बीमारी बढ़ने पर फेफड़े आदि अंगों में भी खराबी आ जाती है और कारबंकल होकर रोगी की मृत्यु हो जाती है
10-वजन कम हो जाना
11-घावों  का देर से भरना
12-घाव में बार-बार मवाद का बनना
13-रोगों का बार बार आक्रमण होना
14-कम उम्र में ही धमनियों के रोगों का होना
15-किसी भी काम में मन न लगना
16-टांगों में पीड़ा एवं दुर्बलता
 17-मूत्र पर चीटियों का एकत्र होना
 18-सर्दियों में भी ज्यादा प्यास का लगना
 19-सोने या आराम करने की प्रबल इच्छा वह अधिक परिश्रम से जी चुराना आदि लक्षण हैं।
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Diabetes की चिकित्सा -
 यह एक ऐसा रोग है जो व्यक्ति को पूरी जिंदगी तक बना रहता है ,इस रोग को नियंत्रित किया जा सकता है परंतु हमेशा के लिए खत्म नहीं किया जा सकता और रोग के रहते हुए रोगी अपनी जिंदगी भली प्रकार से जी सकता है परंतु वह डॉक्टर की सलाह पर अमल करें ।
लक्षणों को नियंत्रित करें ,रोगी में आत्मविश्वास जगाएं जिससे उसे लगे कि वह बिल्कुल ठीक है ।
संक्रमण से बचाव करें ।रोगी के वजन व शारीरिक विकास पर ध्यान दें ।
साथ ही साथ इसकी चिकित्सा चार बातों पर आधारित होती है -
1- भोजन
2-व्यायाम 
3-ग्लूकोस को कम करने की औषधियां

 4--इंसुलिन 
रोगी का भोजन पौष्टिक हो जो उसकी विटामिन व प्रोटीन की आवश्यकता को पूरी करें ।
रोगी के भोजन में चोकरयुक्त आटा, दालें, हरी सब्जियां व फल अधिक होने चाहिए इनमें फाइबर की मात्रा अधिक होने से रक्त में ग्लूकोज की मात्रा एकदम से नहीं बढ़ती है ।
भोजन में चीनी ,गुड़, सहद मक्खन ,घी, मिठाई ,चिकनाई युक्त दूध ,आइसक्रीम ,चॉकलेट ,आलू ,चावल ,आम ,केला ,शकरकंदी  न लें ।इन सब में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बहुत ज्यादा होने से यह ब्लड ग्लूकोस को बढ़ा देते हैं। सूखे हुए  मेवे भी वर्जित करें ।हल्का व्यायाम आवश्यक है पर बहुत अधिक नहीं ,टहलना बहुत ही उपयोगी है।


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