Kyun logo ko ho jati hai Depression janiye iske Karan aur treatment

Depression kya hai

दुख और उदासी की स्थिति को अवसाद कहते हैं ।प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में उतार चढ़ाव आते हैं ।व्यक्ति के मस्तिष्क पर भी इन बातों का प्रभाव पड़ता है  यह  प्रभाव क्षणिक  होता है और कुछ समय बाद व्यक्ति सब कुछ भूल कर अपने काम में पुनः लग जाता है ।जब यही प्रभाव लंबा खींचता है और प्रभावित व्यक्ति 1 सप्ताह या 2 सप्ताह से भी लंबे समय तक उदास रहता है तो यही मानसिक दबाव है ,इसे अवसाद के नाम से जाना जाता है।
 डिप्रेशन दिमाग की एक ऐसी बीमारी है जो व्यक्ति को उदास रखने के साथ-साथ उस को निष्क्रिय बना देती है ।उसके सोचने की क्षमता धुंधली हो जाती है। कोई भी निर्णय लेना उसके लिए काफी कठिन हो जाता है। आमतौर पर डिप्रेशन मानसिक लक्षण के अलावा शारीरिक लक्षण भी प्रकट करता है। आज डिप्रेशन महामारी में तब्दील होता सा नजर आ रहा है ।
आज की भागदौड़ के जीवन में शायद ही कोई व्यक्ति हताशा अथवा अवसाद से अछूता होगा ।सामान्य आबादी में करीब 4% लोग इस बीमारी से ग्रस्त हैं ।हमारे देश में तकरीबन आठ करोड़ लोग इसके शिकार हैं ।यह  बीमारी इतनी आम है कि मनोविज्ञान में इसे कॉमन कोल्ड आफ साइकेट्री कहा जाता है। डिप्रेशन आज इतना  आम हो गया है कि लोग इसे बीमारी के तौर पर नहीं लेते हैं ।आमतौर पर डिप्रेशन को नजर अंदाज किया जाता है लेकिन ऐसा करने का अंजाम बुरा होता है ,क्योंकि इसकी परिणति  आत्महत्या के रूप तक हो सकती है ।
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एक अनुमान के अनुसार डिप्रेशन के 15% लोग आत्महत्या कर लेते हैं ।भारत में आज डिप्रेशन दसवीं सबसे सामान्य बीमारी है ।
ऐसा माना जा रहा है कि सन 2020 तक हमारे देश में डिप्रेशन दूसरी सबसे बड़ी बीमारी हो जाएगी और उस समय तक  यह महिलाओं की सबसे आम बीमारी होगी।
 डिप्रेशन के कारण
यह रोग निम्न कारणों से होता है
1-आज के समाज में मानसिक तनाव डिप्रेशन का एक प्रमुख कारण है ।जब कोई आधुनिक जीवन की बढती मांगों को पूरा नहीं कर पाता तो उसे अप्रसन्नता और तनाव होता है। लंबे समय तक या लगातार रह ने वाला थोड़ा सा तनाव भी व्यक्ति को डिप्रेशन में धकेल सकता है ।जीवन में चलते रहने वाले आर्थिक संकट ,मुकदमेबाजी ,पुराना शारीरिक रोग,और  वैवाहिक संबंधों में  दरारें भी डिप्रेशन का कारण बन सकती हैं ।इच्छाओं  और उन्हें पूरा करने की क्षमता में फासला बढ़ता जाता है ।इसका नतीजा अस्थिरता एवं बेचैनी हो कर अंत मे डिप्रेशन हो जाता है।
2- समाजशास्त्री भारत में  इस रोग की बढ़ोतरी के लिए अकेलेपन को भी दोषी मानते हैं ।वृद्ध लोगों में तो अकेलापन डिप्रेशन का एक मुख्य कारण है ।
3-अध्ययनों से यह ज्ञात हुआ है कि संयुक्त परिवार में रहने वालों की अपेक्षा एकाकी और छोटे परिवारों में   डिप्रेशन का खतरा अधिक होता है
4-खानदानी कारण( Hereditary)
5-थायराइड रोग की स्थिति में डिप्रेशन की संभावना अधिक हो जाती है ।
6-पार्किंसन रोग ,डायबिटीज ,कुष्ठ रोग ,कैंसर  ,गुर्दे बेकार हो जाना  ,हार्टअटैक ,टीवी एवं लंबे समय तक चलने वाले रोगों से  भी  डिप्रेशन हो सकता है।
7- कई बार टाइफाइड ,मलेरिया के बाद  भी डिप्रेशन हो जाता है ।आंतरिक अंगों के कैंसर में  यह आम बात है ।पुरानी  रोगों जैसे गठिया ,माइग्रेन का दर्द इत्यादि में व्यक्ति  प्रायः डिप्रेशन का शिकार हो जाता है ।  सिर की चोट के बाद भी कई मरीज डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं ।
8-हाई ब्लड प्रेशर घटाने की दवाई के प्रयोग से भी डिप्रेशन हो जाता है।
9- अधिकतर महिलाओं को मासिक धर्म प्रारंभ होने के पूर्व के कुछ दिनों में अथवा समाप्त होने के बाद साधारण या तीव्र डिप्रेशन का अनुभव होता है ।गर्भावस्था ,शिशु के जन्म, गर्भपात के एक दम बाद भी डिप्रेशन का अनुभव हो सकता है ।
10-मादक द्रव्यों का सेवन करने पर भी सामान्य  या तीव्र डिप्रेशन हो सकता है ।
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डिप्रेशन के लक्षण 
डिप्रेशन के अधिकतर रोगी शारीरिक तकलीफों की शिकायत करते हैं। जैसे--
1- सिर में भारीपन
2-कमजोरी
3-भूख न लगना
4-सुस्ती
5-छाती में भारीपन या जकड़न
6- दिल जोर जोर से धड़कना
7- थकावट सी रहना और टांगों में कंपन एवं दर्द
 8- कुछ रोगी शरीर के विभिन्न अंगों में होने वाले दर्द की भी शिकायत करते हैं ।इस रोग से पीड़ित व्यक्ति अक्सर पीठ तथा गर्दन में भी दर्द का अनुभव करते हैं।
 कुछ मनोवैज्ञानिक   लक्षण -
1-मुख्यता उदासी
2-काम में जीने न लगना
3- नौकरी या घर की जिम्मेदारी निभाने में कठिनाई 4-अकेले रहने को मन करना
5- एकाग्रता तथा याददाश्त में कमी
6-आत्मविश्वास में कमी
7-कुछ अच्छा न लगना एवं निराशा की अनुभूति
8-तनाव और चिंता बढ़ाने वाले नकारात्मक विचार लगातार दिमाग में घूमना
9-बहुत से रोगी अपने विचारों पर नियंत्रण खोने की भी बात करते हैं ।कुछ को तो लगता है कि वह पागल ही हो जाएंगे।
 बिना कारण होने वाले डिप्रेशन के रोगी सुबह ज्यादा उदासी महसूस करते हैं ।बिस्तर से उठते ही बेचैनी शुरू हो जाती है ।उन्हे लगता है कि वह अंधेरी बंद गली में है परंतु जैसे-जैसे सूर्य पश्चिम की ओर बढ़ता है उन्हें बेहतर लगने लगता है ।शाम तक उन्हें काफी ठीक लगने लगता है। कई रोगियों की शाम के समय हालत ज्यादा खराब हो जाती है। ऐसा हार्मोनल परिवर्तन के कारण होता है ,क्योंकि प्रातः काल में इनका रिसाव अधिक होता है ।
आमतौर पर डिप्रेशन दो प्रकार का होता है --
1-इन्डोजिनस  डिप्रेशन
2-न्यूरोटिक डिप्रेशन

 डिप्रेशन की चिकित्सा
ऐसा माना जाता है कि डिप्रेशन का  दौर 3 से 4 महीने का होता है ।इस कारण मरीज का इलाज 9 माह से 1 साल तक चलता है। कई लोग डिप्रेशन ठीक होने या कम होने पर बीच में ही दवाइयां छोड़ देते हैं ।ऐसी स्थिति में मरीज पुनः डिप्रेशन का शिकार हो सकता है। दवा छोड़ देने के कारण जितनी बार डिप्रेशन का अटैक होगा, मरीज का इलाज उतना ही मुश्किल होगा।
 साइकोथेरेपी की तरह काग्निटिव थेरिपी बहुत ही कारगर विधि है ।ऐसा माना जाता है कि डिप्रेशन का मरीज अपने बारे में तथा आसपास के लोगों एवं अपने परिवेश के बारे में नकारात्मक तरीके से सोचता है। इस कारण उसके विचार में नकारात्मक परसेप्शन आ जाता है ।ज्यादातर चिकित्सक डिप्रेशन के मरीज के लिए दवाइयों के साथ-साथ साइकोथेरेपी का भी सहारा लेते हैं।
 डिप्रेशन के इलाज में योग एवं ध्यान की महत्वपूर्ण भूमिका है ।ध्यान एवं योग से कुछ खास तरह के हार्मोन उत्सर्जित होते हैं जिससे तनाव से राहत मिलती है ।मरीज को पर्याप्त मात्रा में विटामिन लेने से भी फायदा पहुंचता है ।खासतौर पर विटामिन बी सिक्स लाभदायक होता है।
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 इसके अलावा कई लोगों का मत है कि डिप्रेशन के मरीज का वातावरण परिवर्तन कर दिया जाए तो वह ठीक हो सकता है पर वातावरण परिवर्तन के साथ-साथ उचित उपचार की भी बहुत जरूरत होती है इसके अलावा मरीज के आत्मविश्वास को जगाने के लिए एवं उसकी रोग के उपचार के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव इस प्रकार हैं -
1-आशावादी बने (Be positive)
2-केवल अपने बारे में न सोचे। संसार में दूसरे भी हैं ,उनके बारे में भी सोचें।
3-कभी निठल्ले न बैठे
4- कसरत करें
5-मनोरंजक साहित्य पढ़ें
इत्यादि।

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