Kaise ho jata hai Dengue fever janiye iske Karan aur treatment

What is Dengue fever
Dengue fever is an acute,self limited disease.
डेंगू ज्वर उपसर्ग से होने वाला तीव्र स्वरूप का औपसर्गिक ज्वर  है ।इससे प्रभावित रोगी अत्यंत दुर्बलता का अनुभव करता है। टेंपरेचर का अनुबंध बीच में कम होकर पुनः बढ़ता है ।साथ ही पूरे शरीर में विशेषकर अस्थियों एवं संधियों में जकड़ा हट एवं तीव्र वेदना होने के कारण शरीर दंड के समान कड़ा हो जाता है ।प्रायः पांचवें अथवा सातवें दिन के बीच विसर्प के समान त्वचा पर एक विशेष प्रकार के लाल चकत्ते निकलते हैं ।
इसमें ज्वर के साथ-साथ हड्डियों में तेज दर्द होता है और ऐसा प्रतीत होता है जैसे हड्डियां टूट रही हो। त्वचा पर छोटे-छोटे गुलाबी रंग के दाने निकलते हैं ।ज्वर अचानक 104 डिग्री फारेनहाइट तक बढ़ जाता है ।
Dengue fever का कारण - डेंगू का प्रमुख कारण डेंगू वायरस होता है ।
 डेंगू का संक्रमण - इसका संक्रमण क्यूलेक्स मच्छर के द्वारा प्रसारित होता है ।

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संक्रमण का क्षेत्र-- यह रोग संसार के विभिन्न भागों में महामारी के रूप में फैलता है ।हमारे देश में सन 1871 से 1875 तक इस का भयंकर रूप से प्रसार हुआ  था ।समुद्र के निकट के प्रदेशों जैसे- मुंबई ,मद्रास ,उड़ीसा ,बंगाल आदि मे उसका स्थानीय आक्रमण कुछ न कुछ सदैव बना ही रहता है ।
 डेंगू से पीड़ित होने वाले व्यक्ति  -
प्रायः सभी व्यक्ति समान रुप से पीड़ित होते हैं ।
कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में इससे दो से 3 बार से अधिक पीड़ित नहीं होता है ,क्योंकि उनमें क्रमशः रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती जाती है ।
नए रोग ग्रस्त व्यक्ति ही इससे अधिक पीड़ित होते हैं ।।
इस बीमारी का संचय काल 3 से 15 दिन तक होता है।
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Infection se hone wale diseases

 डेंगू ज्वर का लक्षण -
1- तापक्रम -इस रोग में ज्वर  का सहसा आक्रमण होता है ।जो 102 से 105 फारेनहाइट तक चला जाता है ।साधारण आक्रमण होने पर 100फारेनहाइट तक ही रहता है।
2-शूल (Pain) -इसमें आमवात की तरह हाथ पैर ,पीठ ,संधियों तथा कमर में दर्द होता है।
3-यह रोग। अस्थियों को अधिक प्रभावित करता है जिससे रोगी चलने में असमर्थ रहता है ।
4- पहले एक संधि में पीड़ा होती है ।इसके बाद सभी संधियों में पीड़ा होकर रोगी का टेंप्रेचर बढ़ जाता है ।5-मुंह लाल हो जाता है और गले में खराश होती है ।6-वमन तथा कोष्ठबद्धता बनी रहती है ।
7-नाड़ी गति न्यूनता-ताप बढने पर भी नाड़ी की गति न्यून ही बनी रहती है जो इस रोग की एक विशेषता है ।
8-तापक्रम कम होने पर अतिसार एवं पसीना हो जाता है ।
9-कुछ केसेज में नाक से रक्त भी आ जाता है ।
10-रोगी के शरीर तथा हड्डियों में दर्द होता है, जो इस रोग का प्रधान लक्षण है ।दर्द सबसे पहले हाथ की उंगलियों में अधिक होता है और एक जगह से   हटकर दूसरी जगह होने लगता है
11-जीभ का स्वाद बिगड़ जाता है ,कुछ भी खाते पीते नहीं बनता है। रोगी की भूख मारी जाती है ।
12----5-6 दिन के अंदर खसरे के समान दाने निकल आते हैं ।

13--प्रायः 8 वें दिन ज्वर  एकाएक उतर जाता है और पीड़ा भी दूर हो जाते हैं ।तब पसीना तथा  अतिसार प्रारंभ हो जाता है ।
कभी-कभी Mumps की भी शिकायत हो जाती है । डेंगू के अन्य लक्षण -
उपरोक्त लक्षणों के अतिरिक्त रोगी में निम्न  लक्षण की भी संभावना बनी रहती है
1-कटिशूल
2- चलने में असमर्थता
3-अरूचि
4-शिरःशूल
 5-आंख के पीछे शूल होना
6-गर्दन की जकड़न
7- मलावरोध
8-उदरशूल
9-संज्ञाहीनता
10- गले में व्रण व खांसी
11-प्रकाश सहन न होना आदि।

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  डेंगू की सामान्य चिकित्सा --
1-रोगी को 1 सप्ताह तक बेड रेस्ट देना चाहिए।
2-रोग प्रसार के समय बचाव हेतु मच्छरदानी का प्रयोग करें ।
3-उच्च तापक्रम तथा बेचैनी की स्थिति में उबालकर ठंडा किया हुआ जल से शरीर पोछे।
4-वमन अथवा मितली की स्थिति में बर्फ का टुकड़ा चूसने को दें ।
5-प्रथम 3 दिन तक उबला हुआ शीतल पानी अधिक से अधिक दें तत्पश्चात तीसरे दिन से फलों का जूस ,ग्लूकोज पानी थोड़ा-थोड़ा करके दें ।
6-ज्वर तीव्र होने पर सिर पर बर्फ की थैली का प्रयोग करें ।
7-आंख में दर्द होने की स्थिति में वेदना की शांति के लिए बर्फ के टुकड़े को कपड़े में लपेटकर आंख पर रखें।।
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