Brain tumour: causes,symptomps and treatment

 ब्रेन ट्यूमर क्या है --
मस्तिष्क जेली के समान एक ऐसी नाजुक संरचना है जो कि खोपड़ी की कठोर हड्डियों के बीच स्थिर रहता है ।चारों ओर से घिरा होने के कारण मस्तिष्क में किसी भी चीज की अनावश्यक वृद्धि परेशानी खड़ा कर देती है।
 ऐसा माना जाता है कि किन्ही कारणों से कुछ खास तरह की कोशिकाएं अधिक मात्रा में बनने लगती हैं तो वह ट्यूमर यानी गांठ का रुप ले लेती हैं ।
ट्यूमर शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है परंतु दिमाग की गांठ सर्वाधिक खतरनाक गांठों में मानी जाती है।
 ब्रेन ट्यूमर के लक्षण --
दिमागी गांठ को कैसे पहचाने-
 गांठ के कारण अंदर मस्तिष्क का आयतन बढ़ता है ।चारों ओर से बंद होने के कारण बढ़ा हुआ आयतन जब दबाव डालता है तो इसे raized intracranial tension  कहां जाता है ,जिससे निम्न तकलीफें उत्पन्न हो सकती हैं --
1-प्रायः सिर में दर्द
2-किसी अंग विशेष में लगातार कमजोरी
3-बिना उत्तेजना के दौरे पड़ना
4-आंखों की रोशनी घटना
5- मिर्गी के लक्षण पैदा होना

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  ब्रेन ट्यूमर के प्रकार--
 ब्रेन ट्यूमर दो प्रकार के होते हैं--
1- कैंसरस ट्यूमर
2-- नान कैंसरस  या बिनाइन ट्यूमर 
कैंसरस ट्यूमर--1-यह मस्तिष्क के अंदर होता है
2-यह ट्यूमर बहुत तेजी से बढ़ता है क्योंकि इसमें सेल काफी तेजी से विभाजित होते हैं
3- कैंसरस ट्यूमर की जड़े कहां तक अंदर हो सकती हैं इस बात का पता नहीं चलता है
4-मस्तिष्क के लगभग 50 फीसद ट्यूमर कैंसरस होते हैं
 non cancerous tumor --
1-यह मस्तिष्क के बाहर लेकिन खोपड़ी के अंदर होता है
2-यह धीमे धीमे वृद्धि करता है
3-इस में सेलों का विभाजन धीरे-धीरे होता है
4-यह पूर्णतः नियंत्रित होता है
5-यह समूल नष्ट किया जा सकता है
 कैंसरस ट्यूमर को सामान्य तौर पर ग्लायोमा एस्ट्रो साइटोंमा या मेड्यूलो ब्लास्टोमा कहते हैं ।
ग्लायोमा ग्रेड नंबर 1 का कैंसरस ट्यूमर 20 वर्षों तक बिना कोई परेशानी उत्पन्न किए पड़ा रह सकता है ।    ट्यूमर चाहे कैंसरस हो अथवा बिनाइन दोनों ही जीवन के लिए समान रूप से घातक होते हैं।
 कभी संक्रमण की वजह से भी ट्यूमर हो जाता है ।वह वास्तव में ट्यूमर नहीं होता है लेकिन उसका आचरण ट्यूमर जैसा ही होता है।
 ट्यूमर का प्रभाव- यदि ट्यूमर  आंख के पास है तो देखने की शक्ति प्रभावित होती है ,कान की नस के पास ट्यूमर होने पर सुनने की शक्ति प्रभावित होती है ।हड्डियों की चोट पर ट्यूमर होने से वहां पर दर्द होता है ।यदि कभी नाक के अंदर ट्यूमर होता है तो नाक से खून बहने लगता है ।दिमाग के बाएं भाग से दाहिने हाथ की क्रिया प्रभावित होती है अर्थात यदि ट्यूमर मस्तिष्क के  बांए भाग की ओर है तो दाहिने हाथ में कमजोरी आने लगती है और यह धीरे-धीरे बढ़ने लगती है ।

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ट्यूमर का जांच कैसे करें--
  ट्यूमर का  जांच निम्न जाचों से लगाया जा सकता है-ट्यूमर  कि सही स्थिति जानने के लिए सीटी स्कैन या एम आर आई की आवश्यकता पड़ती है ऐसे तो सीटी स्कैन ही ट्यूमर के संबंध में काफी कुछ जानकारी दे देता है किंतु M RI से विशेष लाभ यह होता है कि ट्यूमर कितना बड़ा है ,कहां स्थित है, ट्यूमर  किस प्रकार का है कैंसरस है ,बिनाइन है या संक्रमण के कारण है -इन सभी बातों का ठीक-ठीक पता चल जाता है ।
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ब्रेन ट्यूमर का इलाज--
 ब्रेन ट्यूमर का इलाज दो तरह से किया जाता है
 1-रेडियो थेरेपी के द्वारा 
2-ऑपरेशन के द्वारा 
इलाज की प्रक्रिया ट्यूमर की जांच होने के बाद ही तय की जाती है ।
1- रेडियो थेरैपी- मस्तिष्क में जिस जगह पर ट्यूमर होता है वहां पर चारों ओर से रेडियो तरंगे डाली जाती हैं ।यह तरंगे ट्यूमर  विभाजन वाले स्थान पर इस विभाजन की प्रक्रिया को रोक देती है इससे या तो विभाजन पूरी तरह से रुक जाता है या बहुत कम हो जाता है ।
2-ऑपरेशन द्वारा --न्यूरो सर्जरी, रेडियोथेरेपी या सामान्य सर्जरी से अलग है क्योंकि रेडियो सर्जरी में मस्तिष्क में चीरफाड़ करने की आवश्यकता नहीं पड़ती ,जबकि न्यूरो सर्जरी में ऑपरेशन की तरह मस्तिष्क में एक छोटा सा छेद करना पड़ता है। इससे ट्यूमर वाले स्थान पर जमी कोशिकाओं को काट कर हटा दिया जाता है।
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