Kaise ho jati hai Allergy,janiye iske Karan aur treatment

What is Allergy-

 पिछले कुछ सालों से एलर्जी की बीमारियां बढ़ रही हैं ।इसका कारण वायुमंडल में प्रदूषण, कृत्रिम पदार्थों का अधिक उपयोग, सौंदर्य प्रसाधन सामग्री, फास्ट फूड ,भोजन में रंगों का उपयोग, डिब्बा बंद भोजन का अधिक उपयोग तथा कुछ दवाइयां भी हैं।
 एलर्जी अपने आप में एक विचित्र बीमारी है ।एलर्जी का अर्थ किसी विशेष वस्तु के प्रति शरीर के द्वारा दिखाई जाने वाली अतिसंवेदनशीलता है ।हो सकता है किसी वस्तु का सेवन करने अथवा संपर्क में आने से कोई तकलीफ उत्पन्न हो सकती है ।यह तकलीफ जुकाम ,शीतपित्त, खुजली अथवा अन्य कोई भी हो सकती है। वहीं दूसरी ओर किसी अन्य व्यक्ति के लिए उस चीज में अतिसंवेदनशीलता ना हो ।
एलर्जी किसी भी पदार्थ के प्रति शरीर की असाधारण प्रतिक्रिया है जो सामान्य रूप से शरीर के लिए हानिकारक नहीं होते हैं ।ऐसे पदार्थ प्रायः सांस के द्वारा या खाने के द्वारा शरीर की त्वचा के संपर्क में आते हैं ।जो पदार्थ शरीर के लिए संवेदनशील होते हैं ,उन्हें एलर्जन कहते हैं ।
एलर्जन क्या है -

एलर्जन में मुख्य रुप से परागकण, फंगस ,धूल ,जानवर का मल, पक्षियों के पंख, पंखों की तकिया, रसायन जिनका उपयोग फैक्ट्रियों में होता है, दूषित खाद्य पदार्थ ,कुछ दवाइयां, कीड़े मकोड़े इत्यादि हैं ।

एलर्जन का शरीर पर प्रभाव-

एलर्जन शरीर मे किसी भी माध्यम से प्रवेश कर रक्त में मौजूद सफेद कोशिकाओं को उत्तेजित कर एक विशेष प्रकार के एंटीबाडी बनाते हैं ।यह एंटीबॉडी एंटीजन से मिलकर शरीर के कुछ संवेदनशील भाग जैसे कि नाक ,आंख ,फेफड़े एवं पेट में सूजन पैदा कर देते हैं ।

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एलर्जी बीमारी  शरीर के किसी भी भाग में हो सकती है ।यह प्रायः फेफड़े ,नाक( हे फीवर, जुकाम), त्वचा में एक टॉपिक एक्जिमा या कांटेक्ट डर्मेटाइटिस या पीत्ती पैदा कर सकती है ।
हे फीवर-

 कारण-परागकण,फफूंदी आदि के कारण आंखों एवं नाक में खुजली या पानी आना,गले एवं तालू में खुजली होना।
 एलर्जी जुकाम-

 नाक बंद होना या नाक बहना या छीके आना ।यह किसी विशेष मौसम या पूरे साल हो सकता है ।
कारण --ऐसा जुकाम निम्न कारणों से हो सकता है --धूल
परागकण
फफूंदी
डस्टमाइट आदि से
 कभी-कभी इसके साथ साइनोसाइटिस (साइनस के बंद होने के फलस्वरूप होने वाला जुकाम) भी मिलकर इसे बढ़ा सकता है ।
दमा --

लक्षण --खांसी आना, खांसने पर फेफड़ों से हल्की सीटी बजना, छाती में तनाव, भागते समय सांस का फूलना।
कारण-दमा अक्सर  वंशानुगत पाया जाता है ।श्वास के द्वारा अंदर जाने वाले एलर्जन, घर की धूल ,जंगली बूटी ,फूल के परागकण, हवा में फैले हुए फफूंदी के बीज, कई दिनों से बंद कमरे, अलमारियां ,पुराने कागज ,सीलन वाली जगह जहां रोशनी और हवा नहीं आती ,वहां भी फफूंदी हो सकती है ।कीड़े मकोड़े ,जानवर जैसे कुत्ता ,बिल्ली तथा पंख वाले पक्षी तोता चिड़िया आदि ।

अचानक मौसम में बदलाव-

 तापमान में परिवर्तन,नमी का बढ़ना, ठंडी हवा के चलने से भी दमा हो सकता है ।

उत्तेजक तत्व-

यह एलर्जन नहीं होते ,पर यह दमा बढ़ा सकते हैं ।जैसे धूम्रपान ,इत्र आदि
कुछ दवाइयां भी एलर्जन उत्पन्न कर सकती हैं  जैसे पैर दर्द ,बुखार एवं सूजन की कुछ दवाइयां ।

   allergic dermatitis or eczima -

अक्सर यह बगल, जांघ ,गर्दन में होता है ,पर  यह पूरे शरीर में कहीं भी हो सकता है। यह प्रायः दूसरी एलर्जी की बीमारियों के साथ होता है ।खाने पीने के कुछ पदार्थों से भी हो सकता है।

 contact dermatitis-

 त्वचा के एलर्जन से संपर्क में आने से यह होता है ।जैसे जानवर ,पेड़ ,रसायन, साबुन विशेषकर कपड़े धोने का साबुन ,कास्मेटिक जैसे क्रीम ,बिंदी, बनावटी आभूषण ,हार, कड़े, टॉप्स ,सब्जी काटने से उससे निकलने वाले पानी या प्लास्टिक आदि से।

 पित्ती Urticaria-

त्वचा में सूजन एवं खुजली, आंख ,होंठऔर कान ,,चेहरे, गले ,जुबान में सूजन ।
कारण -
प्रायः खाने के पदार्थ, दवा
यह देखा गया है कि एलर्जी 2 साल से कम उम्र के बच्चों में भी हो सकती है ।
पिछले कुछ सालों से एलर्जी की बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं। इसका कारण वायुमंडल में प्रदूषण ,कृत्रिम पदार्थ का अधिक उपयोग, प्रसाधन सामग्री ,फास्ट फूड ,खाद्य पदार्थों में रंगों का उपयोग, डिब्बा बंद भोजन का अधिक उपयोग तथा कुछ दवाइयां आदि हैं ।
बचपन का दमा, हे फीवर का अगर ठीक से उपचार न कराया गया तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं ।

एलर्जी का उपचार-

 एलर्जन  को मरीज के संपर्क में आने से रोका जाना चाहिए। यदि आपको सेमल की हुई के तकिए से एलर्जी है तो आप तकिया ना लगाएं ।अगर आपको धूल से एलर्जी है तो आप धूल से बचें ।इसके अतिरिक्त निम्न बातों का भी ध्यान रखें ।
समय से दवा लें।
 इन्हेलर आदि का प्रयोग करें ।
एलर्जी टेस्ट द्वारा एलर्जी का पता लगाएं ।

एलर्जी की पहचान --

रोगी से बीमारी का इतिहास, उसके कार्य करने की जगह ,वातावरण ,खान पान तथा रहन सहन से जान सकता है ।इसके बाद भी कुछ जरूरी टेस्ट कराने पड़ते हैं ।एलर्जी टेस्ट से एलर्जी के कारणों का पता लगाया जा सकता है ।

एलर्जी के मरीजों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक निर्देश-

 एलर्जी के मरीज को संतुलित आहार तथा मौसम के ताजे फलों का उपयोग करना चाहिए।
पैकिट का खाना ,बासी भोजन एवं खाद्य पदार्थ एवं वह भोजन जिसमे रंग एवं तेज महक पड़ी हुई हो ,का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए ।
धूम्रपान एवं उसके धुंए से बचाव एवं परहेज करें ।कमरे में अधिक नमी न हों, बल्कि पर्याप्त धूप और ताजी हवा आनी चाहिए।
 कालीन एवं दरी का उपयोग न करें।
सेमल की रूई के   बजाय  फोम के तकिए का इस्तेमाल करें ।
गद्दे एवं तकिए में पॉलिथीन का कवर चढ़ाएं ।
कुत्ता ,बिल्ली एवं पक्षी  न पालें।
 सोने के कमरे में धूल ,पुराने कपड़े ,सिलन,पानी का जमाव नहीं होना चाहिए ।
कपड़ा ,रजाई ,गद्दा आदि प्रति दिन धूप में सुखाएं ।मरीज को बहुत दिनों से बंद पड़े कमरे या भीड़ वाले स्थान में नहीं जाना चाहिए ।
अधिक दिनों से बंद कमरे की खिड़कियां ,दरवाजे खोल दें फिर  उसमें प्रवेश करें।
 जुकाम खांसी आदि के मरीजों से दूर रहें।
 कॉकरोच ,मच्छरों एवं मक्खियों से घर को मुक्त रखें ।यदि कूलर का इस्तेमाल होता हो तो हर साल उसकी घास को बदलिए। पहले पानी चला कर बाद में पंखा चलायें,जिससे घास पर जमी गर्द कमरे में न आये।
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