What is typhoid,causes and symptoms

 टाइफाइड ज्वर क्या है--
टाइफाइड ज्वर को  मंथर ज्वर ,मोतीझरा ,आंत्रिक ज्वर या मियादी बुखार भी कहते हैं। 
यह निरंतर रहने वाला छूत का संक्रामक fever है ।जो इन्फेक्शन लगने के 5 से 14 दिन के बाद कंपन के साथ प्रकट होता है ।
ग्रीष्म ऋतु तथा पतझड़ ऋतु में यह fever अधिक होता है ।विशेषकर 20 से 24 वर्ष की आयु के व्यक्ति इस ज्वर से अधिक ग्र सित हुआ करते हैं ।गर्भवती स्त्रियों और दुग्धपान करने वाले शिशुओं को यह fever बहुत कम होता है, परंतु बड़े बच्चों को यह fever अधिकता से हुआ करता है ,वृद्धावस्था में भी यह fever कम होता है।

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 एक बार यह ज्वर  हो जाने पर शरीर में इसके विरुद्ध प्रतिरक्षा शक्ति (इम्यूनिटी) उत्पन्न हो जाया करती है ।इसलिए यह ज्वर प्रायः दोबारा नहीं हुआ करता है ।कभी-कभी टाइफाइड और मलेरिया इकट्ठे भी हो जाया करते हैं ।
इस रोग का कारण एक अति सूक्ष्म कीटाणु है जिसे 'बेसिलस टाइफोसिस' कहते हैं। यह कीटाणु रोगी के मल मूत्र में अधिक संख्या में पाया जाता है ।यह कीटाणु कच्चे दूध, दूषित एवं गंदे पानी, कच्ची और मैली सब्जियों के द्वारा आंतों में पहुंचकर  fever उत्पन्न कर देते हैं।
 टाइफाइड ज्वर के लक्षण--
यदि किसी अविराम ज्वर में सामने कपाल में भयानक दर्द, भूल बकना, बहुत बेहोशी, पेट फूलना ,तल पेट दबाने पर गड़गड़ाना, कब्ज या अतिसार ,जल्दी-जल्दी कमजोर होते जाना ,धीरे-धीरे ज्वर का बढ़ना, धीरे-धीरे विलंब से आरोग्य होना( सीढ़ी चढ़ने और उतरने की तरह )नाक से खून गिरना, रक्त की दस्त, जीभ पहले लाल इसके बाद क्रम से सुखी और भूरी हो जाना ,फटी फटी की तरह हो जाना और प्लीहा का बढ़ना, मेसेण्ट्रिक ग्लैण्ड का फूलना,  फुसफुस आदि यंत्रों का परिवर्तन होना इस तरह के कितने ही लक्षण दिखाई दें तो उसको टाइफाइड या Interic फीवर समझना चाहिए ।

यह बीमारी गर्मी और शरद ऋतु में ही ज्यादा होती है अस्वस्थ और रोगी मनुष्यों की अपेक्षा सबल और स्वस्थ व्यक्तियों पर इसका अधिक आक्रमण होता है ।
यह ज्वर पहले सप्ताह में 1 डिग्री फारेनहाइट प्रतिदिन इस प्रकार बढ़ता जाता है कि शाम के समय डेढ़ डिग्री बढ़ जाता है और सुबह प्रातः समय आधी से 1 डिग्री घट जाता है ।इस प्रकार प्रथम दिन 99 डिग्री फारेनहाइट से आरंभ होकर छह-सात दिन में 103 डिग्री फारेनहाइट तक हो जाता है ।प्रथम सप्ताह के अंत में छाती और पीठ पर गुलाबी रंग की गोल-गोल दाने निकल आते हैं जो आपस में मिलकर धब्बे बन जाते हैं अथवा गुलाबी रंग के धब्बों की बजाय गर्दन छाती और पेट पर खसखस की भांति सफेद दाने निकल आते हैं ।
दूसरे सप्ताह में ज्वर निरंतर एक दशा में 102 या 103 डिग्री फारेनहाइट तक बना रहता है। जीभ पर सफेद मैल  की तह जमी होती है ।परंतु जीभ की नोक और किनारे लाल हो जाते हैं यह इस रोग के परीक्षण का मुख्य लक्षण माना जाता है ।
तीसरे सप्ताह में  ज्वर 1डिग्री  daily कम होना आरंभ हो जाता है।  जी मिचलाता है ,सिर दर्द होता है, तिल्ली(spleen ),यकृत(liver) बढ़ जाता है दाल के पानी जैसे बार-बार दस्त  आते हैं ,पेट फूला हुआ रहता है और दाएं जांघ में दर्द होता है। छोटी ऑत में घाव हो कर रक्तस्राव का भय बना रहता है इसीलिए तीसरे सप्ताह को सबसे अधिक गंभीर समझा जाता है। यदि आत छिल जाए या रक्त बहने लगे तो उस स्थान पर पेट में दर्द होने लगता है शरीर का तापमान एकाएक गिर  जाता है और रोगी अत्यंत कमजोर हो जाता है। कभी-कभी नकसीर भी आने लगती है ।यदि गर्भवती स्त्री को यह  fever हो जाए तो गर्भपात का भय रहता है।
 गर्दन और पेट पर  खसखस जैसे दाने निकलना और कब्ज रहने के अतिरिक्त अन्य सभी लक्षण घातक और भयानक समझे जाते हैं ।
दानों के ढलने की अवधि में बच्चों को सुस्ती ,उदासी पन ,कपकपी, माथे में दर्द ,भूख की कमी, पतले दस्त, नाक से रक्त स्राव ,कभी कब्ज और कभी पेट दर्द इत्यादि लक्षण भी होते हैं।
 टाइफाइड रोग की प्राकृतिक  चिकित्सा --
टाइफाइड रोग में भोजन कम मात्रा में खिलाएं ।दही का मट्ठा (whey),अंडे की सफेदी पानी में घोलकर दूध के स्थान पर प्रयोग करायें। मीठे सेब का रस पिलाना भी लाभप्रद होता है ।
टाइफाइड की रोगी की आंत में खमीर एवं खराश उत्पन्न हो जाने के कारण दस्त आने लग जाते हैं ।दस्त बंद करने के लिए पहले पेट दर्द एवं पेट फूल जाने की चिकित्सा करना चाहिए। रोगी को दूध के स्थान पर अंडे की सफेदी पानी में घोलकर अथवा दही का मट्ठा थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार पिलाते रहने से भी दस्तों में आराम आ जाता है।
 कभी-कभी टाइफाइड के रोगी को तिव्र सिर दर्द होता है तिव्र सिर दर्द होने पर सिर पर बर्फ की थैलियां रखवाएं।
 टाइफाइड रोगी को कई बार नींद भी नहीं आती है ऐसी अवस्था में गर्म दूध, हल्की चाय, गरम गरम कॉफी पिलाने या ठंडे जल से स्पंज करने से नींद आ जाती है ।
यह टाइफाइड रोगी के लिए की जाने वाली कुछ प्राकृतिक चिकित्सा है इनके साथ साथ किसी विशेषज्ञ से उचित चिकित्सा भी करवाएं।
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