Rabies kaise hota hai iske karan aur symptoms

कुत्ते द्वारा काटते ही लोगों का भयभीत हो जाना अथवा आशंकित हो जाना स्वाभाविक ही है । रेबीज नामक जानलेवा रोग मनुष्य में कुत्तों से ही फैलता है। भारतवर्ष में प्रतिवर्ष 10,000 से अधिक रोगी सिर्फ इसी रोग से मरते हैं ।यह धारणा गलत है कि किसी भी कुत्ते द्वारा काटे जाने के बाद वह व्यक्ति पागल हो जाता है और मर जाता है ।ऐसा तभी संभव है जब काटने वाला कुत्ता रेबीज नामक रोग से ग्रसित हो ऐसे कुत्ते को रेबिड डॉग अर्थात पागल कुत्ता कहा जाता है।
रक्ताल्पता संबंधी विशेष जानकारी हेतु हमारे द्वारा लिखे गए लेख को देखें जिसका लिंक नीचे दिया गया है
Anaemia in hindi


 रेबीज एक वायरस या विषाणु वाला रोग है ,जो कुत्ते सियार एवं भेड़िए जैसे जानवरों में एक दूसरे से फैलता है। पागल कुत्ते के काटने के तुरंत बाद इस रोग के लक्षण प्रकट नहीं होते क्योंकि रेबीज वायरस काटे हुए स्थान से शरीर में फैलता है। उसकी संख्या में वृद्धि होती है और अंत में जब यह वायरस रोगी के मस्तिष्क में पहुंचता है तो रोग के लक्षण प्रकट होते हैं।
 इस पूरी प्रक्रिया में 15 दिन से लेकर कुछ वर्ष तक लग सकते हैं। इस अवधि को इनक्यूबेशन पीरियड कहा जाता है। यह अवधि बच्चों में कम होती है ।जब कुत्ते ने गर्दन के ऊपर काटा हो, तब भी कम होता है ।वास्तव में इनक्यूबेशन पीरियड एवं रोग की तीव्रता उस व्यक्ति की अपनी रोग निरोधक क्षमता पर बहुत कुछ निर्भर करती है ।
इस रोग से ग्रसित रोगी सुस्त हो जाता है ।वह मानसिक तनाव, भय तथा घबराहट की स्थिति में रहता है। उसकी मांस-पेशियां कमजोर होने लगती हैं और उसे लकवा भी मार सकता है। स्वर यंत्र तथा घुटने की मांस पेशियां काम नहीं करती हैं ।अतः रोगी की आवाज साफ नहीं आ पाती क्योंकि खाना खाने वाली नसों और पेशियों पर इसका रैबीज का आक्रमण होता है। जिसके कारण रोगी को कुछ भी निगलने में बड़ी कठिनाई महसूस होती है। इसे जलांतक रोग या हाइड्रोफोबिया भी कहा जाता है । धीरे-धीरे रोगी की श्वास नली तथा अन्य पेशियों पर भी इस रोग के जीवाणु आक्रमण करने लगते हैं जिसके फलस्वरुप ही विभ्रम तथा अत्यधिक बेचैनी की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और उसके बाद रोगी के संपूर्ण शरीर को लकवा मार जाता है। कभी-कभी रोगी की आवाज कुत्ते के भोंकने जैसी लगती है या वह गूंगा हो जाता है। अंत में 10- 12 दिनों के अंदर रोगी की मृत्यु लगभग निश्चित होती है।

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 आप आश्चर्य करेंगे कि पूरे विश्व में अब तक रेबीज के रोग ग्रसित होकर बचने वाले रोगियों की संख्या मात्र तीन है ।यह रोग कुत्तों के अतिरिक्त अन्य जानवरों से जो पहले  रैबीज ग्रस्त कुत्ते, भेड़िए या सियार के संपर्क से रोग ग्रस्त हो चुके हों के काटने से भी यह रोग हो सकता है।
 यदि काटने वाला कुत्ता पागल है तो इस बात की पहचान सरलतापूर्वक हो सकती है कि वह रेबीज ग्रस्त है अथवा नहीं। रेबीज ग्रस्त कुत्ते के प्रमुख लक्षण निम्न होते हैं-


Rabid dog



 कुत्ते का सुस्त हो जाना, खाना पीना छोड़ देना, मुंह से लार टपकना, बिना मतलब की भूंकना, आक्रामक हो जाना या लकवाग्रस्त हो जाना इत्यादि ।आमतौर पर उपरोक्त प्रथम लक्षणों के दिखाई देने के 7 दिनों के अंदर कुत्ता मर जाता है। इस बीच उस कुत्ते के संपर्क में रहने वाले व्यक्ति अथवा दूसरे जानवर को यह रोग होने की संभावना रहती है और ऐसे कुत्ते द्वारा काटे हुए व्यक्ति को तो शत-प्रतिशत यह डरता है। अतः यदि आपके पालतू कुत्ते में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो बिना किसी मोह के तुरंत उसे दवाइयां सेवन करा कर जान से मार दें और मृत्यु उपरांत उसे जमीन में गाड़ दें या जला दें ।हालांकि पालतू कुत्तों को समय-समय पर एंटी रेबीज की सुई लगवाते रहने से उनसे रैबीज फैलने की संभावना समाप्त हो जाती है।
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 ग्रामीण अंचलों में एक अंधविश्वास है कि 20 नाखून वाले कुत्तों के काटने से ही विष फैलता है याद रखें कि कुत्ते के रैबीज ग्रस्त होने में और 20 नाखून होने में ऐसा कोई संबंध नहीं है।
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