What is balanced diet

हमारा उत्तम भोजन वही है जो जल्दी हजम होने वाला हो और उसमें प्रोटीन, वसा, कार्बोज, लवण, जल इत्यादि बलवर्धक, शक्ति स्थिर रखने वाले पौष्टिक तत्व और रोगों से मुकाबला करने वाले विटामिन उचित मात्रा में सम्मिलित हों।

 जो मनुष्य शाकाहारी हैं और मांस, मछली तथा अंडे आदि से परहेज करते हैं उन लोगों को उनके स्थान पर दूध, दही, घी और मक्खन की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए ।मेहनत मजदूरी करने वाले किसान और मजदूरों को कार्बोज की और बच्चों, गर्भवती एवं प्रसूताओं को अपने भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ा लेनी चाहिए ।आदिमानव पशुओं के समान सब चीजें कच्चे ही खाता था। खाना पका कर खाना आधुनिक सभ्यता की देन माना जाता है। जब से मनुष्य ने आग बनाना सीखा है तभी से वह अपने भोजन को पकाकर खाने लगा है ।सभ्यता के साथ ही साथ पाक कला का भी निरंतर विकास होता चला आया है।
 भोजन को पकाने से हमें बहुत से लाभ और कुछ हानियां भी होती हैं जिनका विवरण हम आगे बताते हैं---
 लाभ --
भोजन को पकाने से खाने की चीजों से रोग उत्पन्न करने वाले कीटाणु गर्मी पाकर नष्ट हो जाते हैं। पका हुआ भोजन शीघ्र ही पच जाता है। पकाने से भोजन स्वादिष्ट हो जाता है और आसानी से चबाने योग्य बन जाता है। अनाजों के स्टार्च जिन पर हमारे पाचक रसों का कोई प्रभाव नहीं होता पकाने से उस स्टार्च के पर्दे फट जाते हैं जिससे वह पचने योग्य बन जाता है। पका हुआ भोजन गर्म होता है और गर्म भोजन पाचन अंगों पर इतना बोझ नहीं डालता है जितना कि कच्चा डालता है ।यही कारण है कि पका हुआ भोजन जल्दी पच जाता है।
 कच्चे या बिना पके पदार्थ खाने से हमारा शरीर आमतौर पर रोगी हो जाता है। पके हुए पदार्थ हमारे शरीर को शक्ति भी अधिक प्रदान करते हैं क्योंकि पकाकर हम भोजन को कई प्रकार का बना सकते हैं कई प्रकार का बनाया हुआ भोजन स्वादिष्ट ,रुचिकर होता है। पके हुए भोजन को हम अधिक समय तक रख भी सकते हैं ।

विटामिंस की अत्यधिक प्रयोग से होने वाले लाभ एवं हानि के बारे में जानने के लिए नीचे का लिंक अवश्य पढ़ें
Effects and side effects of vitamins

जैसे कच्चा दूध जल्दी बिगड़ जाता है किंतु पका हुआ दूध इतनी जल्दी खराब नहीं होता है मांस आदि के न गलने व घुलने वाले अंश पकाने से घुलनशील बन जाते हैं ।
नोट --भोजन पकाने से संबंधित हालांकि नियम तो बहुत अधिक है जैसे भोजन पकाने का स्थान, भोजन पकाने के बर्तन, खाने के बर्तन, खाना सुरक्षित रखने के बर्तनों का साफ और स्वच्छ यानी कीटाणुरहित होना बहुत ही आवश्यक है। और इसी प्रकार बनाने की चीजें खाद्य पदार्थ स्वच्छ और बढ़िया होने चाहिए। सस्ते, गंदे ,घूने हुए गले सड़े द्रव्यों से पूर्णतः परहेज करना चाहिए। किंतु इन समस्त बातों के अतिरिक्त भोजन को न तो अधिक पकाना चाहिए और ना ही उसे कच्चा खाना चाहिए क्योंकि भोजन को अधिक पकाने से उसके विटामिन नष्ट हो जाते हैं यह विटामिन सौ डिग्री तापमान तक ही सहन कर सकते हैं।
 एक मुख्य बात और है कि भोजन बनाने में भारी पानी का भी प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके कारण सब्जी बहुत देर में गलती है और ईधन भी बहुत अधिक लगता है ।इसलिए भोजन बनाने में सदा स्वच्छ हल्का पानी का ही प्रयोग करना चाहिए। भोजन पकाते समय इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि भोजन के परस्पर विरोधी चीजों का  मेल ना हो पाए जैसे दूध और मछली, दूध और मांस, दही और घी, घी और शहद, उड़द की दाल और दही आदि को आपस में मिलाना अनुचित है।
 इस प्रकार की उल्टी-सीधी खाद्य चीजों को मिला देने से अनेक प्रकार के रोग भी उत्पन्न हो सकते हैं ।
यहां कुछ तथ्य भी ध्यान में रखने आवश्यक हैं जैसे जल में कोई चीज उबली हुई तो उस जल को बेकार समझकर फेंकना नहीं चाहिए बल्कि उसे या तो उबलने वाली वस्तु में ही जज्ब कर दें अथवा किसी दूसरी वस्तु के साथ इसका उपयोग करें ऐसा करने से भोजन के तत्वों से आपको हाथ धोना नहीं पड़ेगा। इसी प्रकार सब्जी इत्यादि को काटने के बाद कदापि मत धोइए बल्कि इन्हें काटने से पूर्व ही धो लेना चाहिए ताकि आप को उसके पौष्टिक तत्व भरपूर मात्रा में मिल सके।
 इसी प्रकार चावलों में जल  उतना ही डालना चाहिए जितना कि उनमें खप सकें। चावलों के अधिक पानी यानी माण को फेंकना अनुचित है ।जहां तक भी संभव हो सके साग-सब्जियों को अधिक न छीले क्योंकि सब्जियों के छिलकों में पोषक तत्व बहुत अधिक मात्रा में उपस्थित होते हैं ।
दूध को खुले वातावरण में ना उबालें क्योंकि दूध को खुली कड़ाही में हवा की उपस्थिति में तेज आंच पर अधिक देर तक उबालने से उसके विटामिन ए और विटामिन सी नष्ट हो जाते हैं क्योंकि यह तत्व वायु की ऑक्सीजन से मिल जाते हैं। यदि ढके हुए बर्तन में जहां हवा ना जा सके में दूध उबाल  जाए तो उसके विटामिन नष्ट होने से बच जाते हैं।
 वैज्ञानिकों का कथन है कि भोजन को जितना प्राकृतिक रूप में खाया जाए उतना ही अधिक लाभप्रद व स्वास्थ्यवर्धक होता है ।जैसे गन्ने का ताजा रस जितना अधिक लाभप्रद है उससे कम शक्कर और उससे कम  सफेद भूरा अथवा सफेद चीनी सबसे ही कम लाभ प्र द है क्योंकि  भूरा या सफेद चीनी में कार्बोज के अतिरिक्त अन्य सभी पौष्टिक तत्व नष्ट हो जाते हैं ।
इसी प्रकार अंडे को कच्चा खाने में जितना अधिक लाभ है हल्का उबालकर खाने में उससे कम और उबालकर खाने में और भी कम तथा तलकर या भूनकर खाने में सबसे ही कम लाभ मानव शरीर को प्राप्त होता है ।इसके अतिरिक्त भोजन को अधिक पकाने से कई उपयोगी  आवश्यक अंश जैसे विटामिन ए और विटामिन सी इत्यादि नष्ट भ्रष्ट हो जाते हैं ।सब्जियों को उबालने से उपयोगी नमक और विटामिन पानी में घुल जाते हैं
संक्रमण क्या है और कैसे होता है और इसके द्वारा कौन-कौन से रोग होते हैं इसकी विशेष जानकारी हेतु नीचे का लिंक पढ़ें
Infection and diseases


शरीर को स्वस्थ रखने के लिए रक्त में 80% क्षारपन तथा 20%अम्ल होनी चाहिए। इसीलिए रक्त में खारापन होता है। अतः हमें रक्त को संतुलित बनाए रखना चाहिए ताकि हम निरोग बनेरहें। यदि हमारे रक्त में अम्लता  20% से अधिक हो जाए तो हमारी शरीर में विकार उत्पन्न हो जाते हैं। और हम जो भोजन लेते हैं वह अम्ल युक्त ही अधिक होता है। इसी  के फलस्वरूप हम रोगी  हो जाते हैं ।

रक्त संबंधी विशेष जानकारी के लिए हमारे दिए गए पोस्ट को पढ़ें जिसका  लिंक नीचे दिया गया है
Anaemia in hindi


भोजन से हमें दो लाभ होते हैं एक तो यह हमें बलवान बनाता है दूसरे यह हमें शरीर में ऊष्मा उत्पन्न करके हमें प्रत्येक काम करने की ताकत प्रदान करता है ।भोजन की माप का यह अर्थ नहीं है कि हम उसको नाप कर या तोल कर खाएं बल्कि वैज्ञानिक विधि के अनुसार ताप की माप कैलोरी से की जाती है। भोजन से जो शक्ति प्राप्त की जाती है वह उष्ण संख्या में बताई जाती है इसी को कैलोरी कहते हैं ।प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से लगभग बराबर ही कैलोरी प्राप्त होती है किंतु प्रोटीन या  कार्बोहाइड्रेट की वनस्पति तेल या घी से दुगुनी कैलोरी प्राप्त होती है। प्रत्येक व्यक्ति को उसकी शारीरिक और मानसिक क्रियाओं के अनुसार अलग अलग मात्राओं में कैलोरी की आवश्यकता होती है।
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