Effects and side effects of vitamins

बहुत से लोग बिना चिकित्सक के परामर्श के ही स्वयं ही तरह-तरह के विटामिंस का प्रयोग करते रहते हैं जिन से लाभ भी होता है तो कभी-कभी हानि भी उठानी पड़ती है ।
वैसे एक व्यक्ति को प्रतिदिन 200 मिलीग्राम विटामिंस की आवश्यकता होती है किंतु यदि प्रतिदिन इसकी सेवन की मात्रा बढ़ाकर 400 मिलीग्राम कर दी जाए तो हाथ सुन्न होने लगते हैं तथा चलने में कठिनाई होती है।
 इसी विषय पर संक्षिप्त किंतु बहुत ही महत्वपूर्ण ज्ञान हम आज आपको बताने जा रहे हैं।
 विटामिन ए --चिकित्सक द्वारा बताई गई निर्धारित मात्रा से यदि 5 गुना अधिक विटामिन्स की मात्रा ले ली जाए तो सिर के बाल झड़ना, और सिर में दर्द होना, जी घबराना, मिताली, भूख कम हो जाना ,चिड़चिड़ापन ,थकान ,और सुस्ती की शिकायत उत्पन्न हो सकती है यह विटामिन जहां आंखों के लिए लाभदायक है ।वही विटामिन ए अर्थात बीटा-कैरोटीन के अधिक सेवन से नजर कमजोर भी हो सकती है इस विटामिन की अधिकता से जिगर बढ़ जाता है तथा यह जिगर को पूरी तरह खराब भी कर सकता है। जिगर के साथ ही त्वचा संबंधी रोग भी हो जाते हैं तथा मांस पेशियों तथा जोड़ों में विभिन्न प्रकार की गड़बड़ियां भी आ जाती हैं ।

Vitamins ke tablet



विटामिन B --इसकी अधिक मात्रा सेवन करने से तंतुओं को हानि पहुंच सकती है। दिल की धड़कन कम हो जाती है। कै होने लगती है तथा चेहरा लाल हो जाता है इस की अधिकता से जिगर भी क्षतिग्रस्त हो सकता है।
विटामिन बी कॉन्प्लेक्स-- अधिकतर लोग विटामिन बी कांप्लेक्स की टिकिया व कैप्सूलों का अक्सर सेवन करते ही रहते हैं।  लंबी अवधि तक इनकी प्रयोग से जिगर की बीमारी ,आंतों में घाव व त्वचा के रोग भी हो जाते हैं ।इसका निरंतर अनावश्यक प्रयोग किडनी पर भी
कुप्रभाव डालता है।

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 विटामिन सी- पुराना नजला, जुकाम व  श्वसन तंत्र के रोगों में 1000 मिलीग्राम से 4000 मिलीग्राम विटामिन सी का प्रतिदिन प्रयोग किया जाता है जिससे नाक बहना, छींक आना और जलन आदि से तो आराम मिल जाता है किंतु मानव शरीर को प्रतिदिन मात्र 250 मिलीग्राम विटामिन सी की ही आवश्यकता होती है। अतः अतिरिक्त ली गई विटामिन सी की मात्रा हानि पहुंचाती है। उससे भोजन में उपस्थित प्रोटीन तथा विटामिन बी और विटामिन बी12 नष्ट होने लग जाते हैं। अधिक ली गई विटामिन सी की मात्रा से किडनी में पथरी बनने की संभावना रहती है और यदि किडनी में पहले से ही पथरी हो तो इस विटामिन की अधिकता से पथरी के रोगी की स्थिति और भी अधिक गंभीर हो जाती है।
 विटामिन सी की अधिक प्रयोग से गठिया भी हो सकता है तथा हड्डियों का विकास रुक जाता है ।मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक मात्रा में रक्त स्राव होता है पेट में दर्द व दस्त अथवा डायरिया होने का खतरा रहता है इसके अधिक मात्रा में सेवन करने के परिणाम स्वरुप विद्वान चिकित्सकों ने आंत में फोड़े व कैंसर हो जाने की आशंका व्यक्त की है।

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 विटामिन डी -विटामिनAव D वसा में घुलनशील विटामिन है ।इन विटामिनों को प्रचुर मात्रा में दिया जाता है ।जबकि भारतीय जलवायु में इन दोनों ही विटामिनों का प्रयोग अनावश्यक है ।
यदि पौष्टिक भोजन और धूप का सेवन किया जाता रहे तो विटामिन डी की शरीर में स्वयं ही उत्पत्ति होती है ।
यदि इससे भी अधिक विटामिन डी ग्रहण किया जाए तो शारीरिक तथा मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है ।और बड़ी आयु के लोगों के किडनी को क्षति पहुंच सकती है ।विटामिन डी की अधिकता से पेट व तंत्रिका तंत्र संबंधी रोग भी उत्पन्न हो जाते हैं ।इसकी अतिरिक्त मात्रा शरीर में कैल्शियम जमा कर देती है ,जिससे मांस पेशियों यहां तक कि हृदय शिराओं  के काम करने में रुकावट पहुंचती है। इसके अतिरिक्त विटामिन डी की अधिकता से थकान ,कमजोरी ,वमन व दस्त हो जाना तो आम बात है ।विटामिन  ई--इसको निर्धारित मात्रा से अधिक सेवन करने पर मितली , पेट की गड़बड़ी, सिरदर्द, हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं ।इसके कु परिणाम स्वरुप रक्तस्राव भी हो सकता है। दृष्टि में धुंधलापन, चक्कर आना ,व यौन इच्छा में कमी भी इस विटामिन की अधिकता से देखी गई है ।
विटामिन के-- इस विटामिन की अधिक मात्रा रक्त को जमने से रोकने वाली औषधियों का प्रभाव कम कर देती है ।गर्भवती महिलाओं द्वारा इसके अधिक सेवन से जन्म लेने वाला शिशु पीलिया का शिकार हो सकता है।
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किसी एक विटामिन की आवश्यकता से अधिक मात्रा दूसरे विटामिन की मात्रा को न्यून कर देती है ।विटामिन A को सदा ही विटामिन ई के साथ लेना चाहिए और इन दोनों विटामिंस को लेने के बाद आयरन अधिक मात्रा में नहीं लेना चाहिए।
 धूप विटामिन डी का सर्वोत्तम स्रोत है गोलियों के रूप में लिया गया विटामिन डी हानि पहुंचाता है।
 विटामिन्स से शरीर को अतिरिक्त कैलोरी प्राप्त नहीं होती और ना ही शरीर को शक्ति एवं ऊर्जा ही मिलती है। शरीर के लिए आवश्यक सभी विटामिंस संतुलित भोजन में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं अलग से विटामिन लेने की कोई आवश्यकता ही नहीं है ।विटामिंस का आवश्यकता से अधिक सेवन लंबे समय तक करने से यह आदत स्थाई रूप से बन जाती है जो कि नितांत ही हानिकारक है।
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