Kaise ho jata hai Anaemia janiye hindi me

Aneamea-----वर्तमान समय में रक्ताल्पता एक विश्वव्यापी समस्या है।
 भारत जैसे विकासशील देश के लिए तो यह समस्या और भी अधिक उग्र रूप धारण किए हुए हैं ,क्योंकि यहां 60 से 80% तक 5 वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चे तथा 25 से 30% स्त्रियां और लगभग 50% गर्भवती महिलाएं खून की कमी से पीड़ित हैं और गर्भवती स्त्रियों की 20 से 40% असमय मौतों का कारण भी रक्ताल्पता है ।युवा पुरुष एवं वृद्ध जन भी इस रोग से अछूते नहीं हैं ।इस रोग के कारण रोगी के शरीर में इंफेक्शन शीघ्र होते हैं क्योंकि उनके शरीर में रक्ताल्पता के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है ।
कुछ स्थितियों में तो रक्ताल्पता गंभीर भी बन सकती है प्रयोगों द्वारा ज्ञात हो चुका है कि रक्त में केवल 1.5 ग्राम हीमोग्लोबिन कम हो जाने से ही रोगी की शारीरिक श्रम करने की शक्ति काफी घट जाती है और वह थोड़ा सा काम करने पर ही थक जाता है ।हिमोग्लोबिन  लौह तत्वों से मिलकर बना एक जटिल यौगिक है, जिसके कारण रक्त और रक्त कणिकाओं का रंग लाल रहता है।
 यह रक्त शरीर में विभिन्न अंगों को ऑक्सीजन पहुंचाने का कार्य करता है, रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होने से शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीजन भी कम मिलती है ,इस कारण जैविक ऑक्सीजन की क्रिया घट जाने से शरीर में ऊर्जा भी कम उत्पन्न हो पाती है जिसके फलस्वरुप रोगी की काम करने की क्षमता घट जाती है और वह मामूली सा शारीरिक श्रम करने के उपरांत ही हांफने लग जाता है ।आमतौर पर रक्ताल्पता के सही निदान हेतु चिकित्सक रक्त की जांच करवाते हैं जिसमें लाल रक्त कणिकाओं की खून में संख्या  व हीमोग्लोबिन की मात्रा एक स्वस्थ पुरुष में 13.5 ग्राम से 18 ग्राम प्रति डेसी लीटर और एक स्वस्थ स्त्री में 12 ग्राम से 16 ग्राम प्रति डेसी लीटर होती है
 हीमोग्लोबिन की मात्रा 10 ग्राम के आसपास होने पर उसे साधारण रक्ताल्पता की श्रेणी में रखते हैं और जब हीमोग्लोबिन 7 ग्राम प्रति डेसीलीटर के आसपास होती है तब इसे गंभीर रक्ताल्पता की स्थिति मानी जाती है ।रक्त की कमी के कारण शरीर पर बहुत से दुष्प्रभाव पड़ते हैं। रोगी रक्ताल्पता के कारण मानसिक अवसाद ग्रस्त, या चिड़चिड़ा हो सकता है ।उसे सिर दर्द की भी शिकायत होती है कभी कभी सीने में दर्द और हल्का बुखार भी आता है ।साथ ही अन्य लक्षण जैसे नाखूनों ,हथेलियों और चेहरे का रंग सफेद होना, आंखों के निचले भाग की लालिमा घट जाना ,थोड़े से श्रम से थकान होना अथवा सांस फूलना इत्यादि हैं ।
रक्ताल्पता से निपटने के लिए एक प्रमुख उपाय यह है कि रोगी  अपने खानपान में संतुलित आहार की ओर समुचित ध्यान दें ।प्रोटीन विटामिन और आयरन युक्त आहार जैसे दूध ,अंडे, सोयाबीन, गुड, पालक की सब्जी एवं अन्य हरी सब्जियां तथा फल पर्याप्त मात्रा में खाएं ।
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Diet for aneamic patient




Fruits for aneamic patient



रक्ताल्पता के कई प्रकार होते हैं --जैसे आनुवंशिक रोगों के कारण ,बवासीर अथवा दुर्घटनावश अत्यधिक रक्तस्राव होने से ,आंतो द्वारा भोजन की अवशोषण कम करने से ,कुपोषण अथवा अल्पपोषण इत्यादि ।कुपोषण के कारण ही शरीर को पर्याप्त मात्रा में लौह तत्व तथा विटामिन बी12 और फोलिक एसिड की मात्रा नहीं मिल पाती जिसके कारण रोगी खून की कमी का शिकार हो जाता है।
 एक सर्वेक्षण के अनुसार 56.8 प्रतिशत गर्भवती स्त्रियों और 35.6 %युवा स्त्रियों के शरीर में लौह तत्व की मात्रा कम होने के कारण खून की कमी पाई गई है। वहीं 20 से 50% स्त्रियों में फोलिक एसिड की कमी पाई जाती है ,जो रक्ताल्पता का एक प्रमुख कारण है।
 इन कारणों के अतिरिक्त मलेरिया व उदर कृमि का होना भी है ।इस प्रकार की रक्ताल्पता बीमारी के दूर होने पर स्वयं ठीक हो जाती हैं कुछ औषधियों  का लंबे समय तक सेवन करने से भी रक्ताल्पता की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। शरीर को चलाने के लिए ऊर्जा  यानि शक्ति की आवश्यकता होती है उसे कैैलोरी  कहा जाता है ।शरीर को यह ऊर्जा भोजन से प्राप्त होती है ।शक्ति ,ऊर्जाा या गर्मी को ऊर्जा कहा जाता है ।शरीर के छोटे-बड़े प्रत्येक अवयव को पर्याप्त शक्ति मिल सके ,हड्डी, रक्त, मांस में शक्ति बनी रहे इस सब के लिए  शरीर को वसा, कैल्शियम, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट की आवश्यकता होती है ।कोई एक भी चीज कम या अधिक हो गई तो शरीर का संतुलन गड़बड़ा जाता है। फलस्वरूप शरीर में विकार उत्पन्न हो जाते हैं और body   bimar hone lagta hai

 वसा की अधिक मात्रा शरीर को मोटा बनाती है ।कैल्शियम कम हो तो जोड़ों की तकलीफ ,हड्डियों की टूट-फूट व टेढे हो जाने की शिकायतें उत्पन्न होने लगती हैं। स्वस्थ शरीर के लिए संतुलित आहार अत्यंत आवश्यक है ।


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Our food



संतुलित ऊर्जा प्राप्ति हेतु आहार का संतुलित होना आवश्यक है, ताकि उससे शरीर को आवश्यक पोषक तत्व ठीक-ठीक मात्रा में मिल सके तथा शरीर का पूरा-पूरा विकास हो सके ।भोजन से प्राप्त ऊर्जा को पचाने के लिए श्रम करना भी आवश्यक है ।यदि सक्रिय न  रहा जाए तो यह ऊर्जा खपेगी नहीं और शरीर पर चर्बी के रूप में जमती चली जाएगी जिसके फलस्वरुप शरीर मोटा हो जाएगा ।प्रोटीन की 1 ग्राम की मात्रा में  4 या 5 कैलोरी होती है, 1 ग्राम वसा में 8या 9 कैलोरी होती है तथा 1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट में लगभग 4 कैलोरी होती है ।

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Infection and diseases

डाइटिंग करते समय यदि भोजन से वसा कम कर दिए जाएं और प्रोटीन तथा कार्बोहाइड्रेट लिए जाए तो चर्बी अतिरिक्त रूप से नहीं बढ़ेगी, क्योंकि वसा देर से पचती है  ।भोजन से प्राप्त ऊर्जा श्रम  व व्यायाम में व्यय होती है । एक स्वस्थ व्यक्ति को प्रतिदिन केवल 1250 कैलोरी लेने की आवश्यकता होती है।
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