What is yoga in kundalini

हेलो दोस्तों ---
योग क्या है-- इस विषय पर हम आज चर्चा करेंगे- दोस्तों --कुंडलिनी जागरण में मूल रूप से दो ही उपाय हैं -योग और मंत्र --
मंत्र-तंत्र आदि की चर्चा बाद में करेंगे पहले योग की चर्चा करेंगे जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है योग का अर्थ है जोड़ना या बढ़ाना।

कुंडलिनी शक्ति क्या है

 बढ़ाना अपने केंद्रीयकरण को नियंत्रण को, मनोबल आत्मबल व अपनी शक्तियों को ,और जोड़ना स्वयं को ईश्वर से ,आत्मा को परमात्मा से, स्व को विराट से ,सुषमा को अनंत से चैनलिस्ट कर देना खुद को परम के साथ, इस प्रकार योग एक पुल है जो स्वं को परम से जोड़ता है। योग का अर्थ मात्र शारीरिक कलाबाजियां नहीं है। जैसा कि प्रयः समझ लिया जाता है ।
जो दुख रूप संसार के संयोग से रहित है तथा जिसका नाम योग है। हठ योग, ध्यान योग, ज्ञान योग ,सांख्ययोग, कर्मयोग ,भक्तियोग ,प्रेम योग के नाम तो हमने भी सुने हैं आपने भी सुने होंगे यह सभी योग की विभिन्न प्रणालियां हैं ।

इनमें हठ योग व ध्यान योग कुंडलिनी जागरण के लिए अधिक उपयोगी है इनमें भी विशेष तौर पर ध्यान योग (दूसरी ओर मंत्र और तंत्र दोनों कुंडली जागरण में सहयोगी रहते हैं) किंतु मंत्र विशेष रूप से ।मगर आजकल एक और नाम मार्केट में चल निकला है सहज योग जो ध्यान योग का ही विकृत और भ्रामक रूप है और शास्त्र सम्मत नहीं है ।
योग तो सदैव सहज ही होता है दूस्सहता तो पात्रता उत्पन्न करने में होती है ।अतः सहज योग नाम ही भ्रामक है मार्केट शब्द का प्रयोग भी मैंने इसीलिए किया कि योग कोई दुकानदारी की चीज नहीं है ।परंतु कुछ लोग ऐसा कर रहे हैं बहरहाल इस विवाद में हम नहीं पडेगे परंतु जिज्ञासु पर अल्पज्ञ पाठकों को माया के जाल से सावधान कर देना हमें युक्तिसंगत मालूम होता है इतना अवश्य कहेंगे कि जो व्यक्ति सामूहिक कुंडलिनी जागरण का दावा करे या कुंडली जागरण करने देने का ही दावा करें वही ठग है ।क्योंकि दावा संभव ही नहीं होगा इस मार्ग में ।
प्रत्येक व्यक्ति के स्वभाव अलग-अलग होते हैं ।प्रत्येक व्यक्ति के संस्कारों और विकारों की भी अलग-अलग स्थितियां रहती हैं ।प्रत्येक व्यक्ति की मानसिकता ,सामर्थ्य ,लगन भी विभिन्न स्तरों की होती है ।

अलग-अलग सोच के क्या परिणाम होते हैं

प्रत्येक व्यक्ति का भाग्य भी अलग होता है ।अतः निश्चित  अवधि में एक ही मार्ग प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनुकूल नहीं होता है।कोई तंत्र मार्ग से सफल होने की संभावनाओं वाला होता है कोई मंत्र मार्ग से, कोई हठयोग से तो कोई ध्यान योग से।
 इतना ही नहीं ,संभव है किसी को एक ही झटके में सफलता मिल जाए संभव है कोई अनगिनत झटके भी चूक जाए ।यह भी संभव है कि पूरे जीवन किसी को झटका ही महसूस न हो ,ऐसे लोग भी हो सकते हैं या हुए हैं जो जन्म जन्मांतरों के बाद सफलता प्राप्त करते हैं अच्छे-अच्छे योगी भी सिर पटक कर रह जाते हैंऔर कुंडलिनी जागृत नहीं होती फिर भला इस विषय में दावा कैसे संभव है ।
एक ही रोग कि बहुत से औषधियां होती हैं कौन सी किसे देनी है ,,कब और कितनी देनी है ,कैसे और कब तक देनी है ,यह निर्णय कुशल बैद्य रोग की गंभीरता ,रोग की अवधि ,रोगी की स्थिति ,रोगी की अवस्था ,रोगी की क्षमता ,रोगी की प्रकृति व स्वभाव तथा ऋतु या समय के आधार पर लेता है सबके लिए एक ही औषधि एक ही अवधि तक और एक ही मात्रा में देनी कल्याणजनक नहीं मानी जा सकती ।
और सच बात तो यह है जो लाखों रुपए की है कि जो व्यक्ति कुंडलिनी जागृत कर लेता है वह नाम के लिए ,यश के लिए ,मान के लिए ,धन के लिए, सुविधाओं के लिए अथवा अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए कभी -तुम्हारी कुंडलिनी भी जगा दूंगा ऐसा दावा कर के चेलों की भीड़ नहीं जुटाता ।उसे पोस्टर लगवाने या पब्लिसिटी की जरूरत भी नहीं होती ।जब सूर्य उदय होता है अथवा फूल महकता है तब स्वयं ही सभी लोग जान लेते हैं उसे अपने प्रकाश या सुगंध को विज्ञापित नहीं करना पड़ता जो प्रदर्शन चाहता है ,तालियां चाहता है पैर छूने वालों की भीड़ ज्यादा चाहता है वह तो अपूर्ण है ,पूर्ण नहीं ।पूर्णता में समस्तत एषडायें समाप्त हो जाती हैं। वह वास्तव में ब्राह्मण कहलाने का अधिकारी हो जाता है। जिसकी कुंडलिनी जागृत हो जाती है जिसकी परम से लौ लग जाती है ,जो सिद्धावस्था में पहुंच जाता है ,वह तो प्रचार  से दूर भागता है वह तो प्रकाश और सुगंध को भी इसलिए रोक देना चाहता है कि दूसरे लोग उसके आत्मोत्थान को जानकर उसके पीछे न लगे उसकी अपनी साधना में व्यवधान न पड़े ।हां मगर नया-नया मुल्ला ज्यादा अल्रलाह अल् लाह करता है। नया पहलवान हाथ चौड़ी करके और सीना निकाल कर चलता है ,किंतु फलदार वृक्ष तो सदा झुकता है ।ओछे व्यक्ति को थोड़ी सी सफलता सहन नहीं होती ।कहावत है -ओटों के घर तीतर बाहर रखें कि भीतर या चूहे को मिली कट्टर Bajaj बन गया।

मैं कौन हूं

 इसलिए ,वह जो दिखावा कर रहा है या तो थोड़ा सा जानता है या बिल्कुल ही नहीं जानता या तो यश और मान चाहता है ,दूसरों को प्रभावित करना चाहता है अथवा अपना उल्लू सीधा करने के लिए दूसरों को मूर्ख बनाना चाहता है
आज के अंक में बस इतना ही
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