Raat ko jhadoo kyun nahi lagana chahiye

मान्यता एक _गाय को माता कहना क्या उचित है ?वेद विदित 3 माताएं मानी गई हैं प्रथम अपनी माता जिसके गर्भ से जन्म होता है दूसरी गौ माता जिसके दूध से बालक का पालन पोषण होता है गाय का दूध बच्चे के लिए संतुलित आहार होता है जबकि भैंस का दूध मीठा और गाय के दूध की अपेक्षा मोटा होता है किंतु बच्चों के लिए उत्तम नहीं होता क्योंकि भारी दूध आसानी से पचता नहीं है ,माता के दूध के बाद गाय का दूध सर्वोत्तम और पौष्टिक होता है जिस तरह अपना दूध पिलाकर माता अपने बच्चे का पालन पोषण करती है माता का दूध किन्ही कारणों से कभी बंद हो गया है तो गाय के दूध से बच्चे का पालन-पोषण उचित रूप से किया जा सकता है गाय का दूध ना मिलने पर भैंस या बकरी का दूध उतना पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक नहीं होता और तीसरी माता पृथ्वी को माना गया है ।
मान्यता दो _क्या पृथ्वी को माता कहना उचित है ?गर्भधारण करने के बाद माता अपने बच्चे का भार ढोती है 9 महीने बाद बच्चे का जन्म होता है और जन्म के दिन से ही पृथ्वी उस बच्चे का भार अपने ऊपर ले लेती है अर्थात जन्म के बाद पृथ्वी उस बच्चे का पालन-पोषण खेलना हंसना रोना सभी कुछ पृथ्वी पर ही होता है 9 महीने बच्चे को अपने पेट में लिए हुए जो इस्त्री घूमती  है वह उसकी माता कहलाती है जबकि बच्चा जब जन्म लेता है उसी दिन से उसका भार सारी उम्र तक पृथ्वी पर होती है ।पृथ्वी की गोद में बच्चा धीरे-धीरे जवान होता है जवानी के बाद वृद्ध होता है और अंत में मृत्यु को प्राप्त हो जाता है और यह शरीर मिट्टी में मिल जाता है अंत समय में पृथ्वी अपने बच्चे को अपनी गोद में छिपा लेती है इस तरह जन्म देने वाली भी माता है और पृथ्वी भी माता है अतः हर दृष्टिकोण से पृथ्वी को माता कहना उचित ही है ।
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मान्यता 3 _क्या किसी वस्तु के किसी कारण से अशुद्ध हो जाने पर वह अग्नि में डालने पर शुद्ध हो जाता है ?
अग्नि देवता कहे जाते हैं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो भी वस्तु अग्नि में डाली जाती है उसे अग्नि देवता शुद्ध कर देते हैं लंका के राजा रावण को मारने के बाद श्री रामचंद्र जी ने लोगों के सम्मुख सीता को शुद्ध प्रमाणित करने के लिए उन की अग्नि परीक्षा ली थी .अग्नि हर दृष्टिकोण से शुद्ध है सोनार सोने और चांदी की शुद्धता परखने के लिए उसे अग्नि में डालकर तपाते हैं ।
खानेपीने वाला कोई बर्तन किसी कारणवश अशुद्ध हो गया हो तो लोग उसे अग्नि में डालकर शुद्ध करते हैं सोने चांदी की वस्तुएं अग्नि में डालने पर जो अशुद्धता होती है वह आग की गर्मी से पिघल कर अलग हो जाती है और शुद्ध सोना या चांदी अलग हो जाता है खाने पीने के बर्तन अशुद्ध होने पर अग्नि में डालने पर उसे चिपके वायरस या कीटाणु जलकर भस्म हो जाते हैं और बर्तन शुद्ध हो जाता है । अतः अग्नि पूर्ण रूप से पवित्र है पूर्ण रूप से पवित्र है ।
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मान्यता 4 _क्या रात के समय घर में झाड़ू नहीं लगाना चाहिए?
 यह सच है कि घर में लक्ष्मी का आगमन रात के समय ही होता है क्योंकि लोग दिन भर घर से बाहर रहकर कमाते हैं चाहे वह कमाई का साधन व्यापार हो या नौकरी या खेती-बाड़ी दिन भर काम करने के बाद शाम को या रात को दिन भर की कमाई लेकर लौटते हैं वह कमाई ही लक्ष्मी है जो रात में ही घर की दहलीज के अंदर कदम रखती है इसीलिए लोग रात में झाड़ू मारने से मना करते हैं क्योंकि आती हुई लक्ष्मी वापस लौट जाती है अर्थात अपने हाथों से अपनी लक्ष्मी को झाड़ू मारते हैं ।
मान्यता 5 __क्या कुत्तों की दिव्य दृष्टि होती है ?
कुत्तों की दिव्य दृष्टि होने का तात्पर्य उन की पहचान शक्ति से है अगर आप अंधेरी रात में कहीं से आ रहे हैं आप कुछ बोले या ना बोले चुपचाप भी आ गए हैं तो भी आपका कुत्ता आपको पहचान जाएगा लेकिन आप की जगह कोई बाहरी व्यक्ति हो तो उसे देख कर भूकने लगेगा यह उसकी पहचान शक्तिति ही है। कुत्तों में सुनकर पहुंचाने की अद्भुत क्षमता होती है कुत्तों की इन्हीं क्षमता के कारण जासूसी विभाग में पहचान करने के लिए विशेष किस्म के प्रशिक्षित कुत्ते रखे जाते हैं जो अपराधी को उनके पद चिन्हों का पीछा करते हुए उन तक पहुंच जाते हैं जबकि अपराधी को जानते तक नहीं और न त उन्हें जाते हुए ही देखा होता है यह उनकी दिव्य दृष्टि का कमाल होता है ऐसी दृष्टि हम मनुष्यों के पास नहीं होती है ।




कलश को मांगलिकता का प्रतीक क्यों माना जाता है 

--पौराणिक ग्रंथों के अनुसार कलश में ब्रह्मा, विष्णु और महेश सृष्टि की इन 3 सर्वश्रेष्ठ शक्तियों का तथा मातृगणअर्थात माताओं का निवास बताया गया है ।सीता जी की उत्पत्ति के विषय में प्रमाण मिलता है कि राजा जनक के राज्य में सूखा पड़ गया था जिस के उपचार हेतु देवर्षि नारद ने उन्हें सोने का हल चलाने को कहा था, हल चलाते समय हल का फाल भूमि में गड़े हुए कलश से टकराया जिससे तेज ध्वनि हुई और टूटे हुए मटके के अंदर से बाल रूप में सीता जी उत्पन्न हुई जिन्हें जगत माता कहा जाता है ।


धर्मराज शनिदेव को तेल क्यों चढ़ाया जाता है इसकी जानकारी के लिए नीचे का लिंक अवश्य पढ़ें
शनिदेव को तेल चढ़ाते हैं क्यों

समुद्र मंथन के समय प्राप्त  अमृत भी कलश में ही था। प्राचीन मंदिरों या तस्वीरों में भगवती लक्ष्मी को दो हाथियों द्वाराकलश जल से स्नान कराते हुए आप देख सकते हैं ।।।अर्थात कलश पूर्ण रूप से पवित्र माना गया है।
 देवी की पूजा हेतु कलश स्थापित किया जाता है जिसका अर्थ यह होता है कि कलश रूप में स्वयं देवी मूर्तिमान होकर भी आती हैं ।कोई भी शुभ कार्य जैसे ग्रह प्रवेश ,ग्रह निर्माण, विवाह पूजा, अनुष्ठान आदि में कलश की स्थापना की जाती है।कलश को लोग लाल वस्त्र ,नारियल ,आम के पत्तों  से अलंकृत भी करते हैं कहीं-कहीं गाय के गोबर से भी टिकते हैं ।गाय के गोबर में TB के जीवाणुओं की मारक क्षमता होती है यह वैज्ञानिक परीक्षणों से सिद्ध भी हो चुका है।
अधिकतर मंदिरों में गुंबद क्यों बने होते हैं ---ध्वनि सिद्धांत और वास्तुकला की दृष्टि से गुंबद मंदिर का अति महत्वपूर्ण भाग होता है। प्रतिमाओं, देवताओं के समक्ष बैठ कर पूजा अर्चना करते समय साधक के मुख से उच्चारित मंत्र ध्वनि गुंबद से टकराकर घूमती  है क्योंकि गुंबद सकरा होता है जिसके कारण मंत्र शक्ति केंद्रीभूत होकर देवी प्रतिमाओं को जागृत करती हैं और जागृत होकर देव प्रतिमाएं साधक को उसकी इच्छा अनुसार फल प्रदान करती हैं गुंबद का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह महत्व है कि उस पर तेज हवा तूफान और वर्षा का प्रभाव बहुत कम पड़ता है जिससे मंदिर ज्यादा समय तक सुरक्षित बना रहता है
आज के अंक में बस इतना ही 
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