What is opportunity and success

अवसर जीवन का दुर्लभ सत्य है  बिना अवसर पाए योग्यता अयोग्यता बनकर मुक रहती है  ।अवसर साकार करके जीवन की दिशा दशा बदली जाती है समय पर सामने आते अवसर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष होते हैं कुछ अवसर स्वयं हमारे पास आते हैं तो कुछ खोजे जाते हैं कोई अवसर तलाशता है किसी को अवसर तलाशता है  सामान्य पत्थर साधारण व्यक्ति के लिए मामूली है जौहरी के लिए बहुमूल्य हीरा है ।जौहरि के परखने से वंचित किया सामान्य लोगों द्वारा सामान्य पत्थर की भांति फेंका जाता है सही मूल्यांकन की नीर क्षीर कि दृष्टि के बिना अवसर निरर्थक हो जाते हैं बार-बार की अनदेखी घातक है

बच्चों की अनदेखी करने से उनके मन पर इसके क्या प्रभाव होते हैं इसे जानने के लिए हमारे द्वारा लिखे गए पोस्ट को पढ़ें

बच्चों की अनदेखी के क्या परिणाम है

 अवसर सदा अमूल्य होता है नर को नारायण बनाता है इसकी कोई तुलना नहीं है सही अवसर सफलता का शिखर देता है ।अअवसर रंक से राजा, बिना अवसर राजा को रंक बना देता है, अवसर चिड़ी की भांति उठाता गिराता है ।समय का हर पल  एक अवसर जिसे पहचानने के लिए जौहरी दृष्टि आवश्यक है ।
अवसर का श्रेष्ठ उपयोग सामान्य से विशिष्ट बनाता है अवसर किसी खास समय विशेष फल समय का पर्याय बनता है ।अवसर पारस पत्थर की भांति लोहे जैसे मानव जीवन को स्वर्ण सा.तपाकर चमकाता  है धैर्य से शाश्वत शिलालेख में नाम अंकित कराता है । अवसर पहचानने में समय परख अनिवार्य है , शिखर पर बैठा कौवा गरुड़ नहीं बनता पर  बैठते ही गरुण कहलाने लगता है । कछुए को लक्ष्य जूझकर मिलता है ।विशिष्ट अवसर ऐसे नहीं आते और ना ही इनका लाभ सामान्य लोग पाते हैं बिना योग्यता क्षमता के इनका उपयोग असंभव है। उच्च योग्यता विकसित कर कठिनाइयो से जूझते हुए सामना करना चाहिए कहावत है _0pportunity knocks at the door but once.
सफलता _सफलता आदमी के अवगुणों को छुपा देती है all asafalta आदमी के गुणों को भी छिपा देती है यह आवश्यक नहीं है की सफलता प्रथम प्रयास में ही मिल जाए जो आज शिखर पर पहुंचे हैं वह भी कई बार गिरे हैं ठोकरें खाई हैं उस शिशु को देखिए जो अभी चलना सीख रहा है चलने के प्रयास में वह बार-बार गिरता है किंतु उसका साहस कम नहीं होता गिरने के बावजूद भी प्रसन्नता और उमंग उसके चेहरे की शोभा को बढ़ाती ही है जरा विचार करें उस नन्हे से बीज के बारे में जो अपने अंदर विशाल बीच उत्पन्न करने की क्षमता समेटे हुए हैं आज जो विशाल वृक्ष दूर-दूर तक अपनी शाखाएं फैलाए खड़ा है जरा सोचें कितने संघर्षों झंझावातों को सहन करने के बाद वह इस स्थिति में पहुंचा होगा यदि लक्ष्य स्पष्ट हो उसको पाने की तीव्र उत्कंठा हो और उसका हो तो अकेला व्यक्ति भी बहुत कुछ कर सकता है अस्त होने के पहले सूर्य ने पूछा कि मेरे अस्त हो जाने के बाद दुनिया को प्रकाशित करने का काम कौन करेगा तब एक छोटा सा दीपक सामने आया और उसने कहा प्रभु जितना मुझसे हो सकेगा उतना प्रकाश करने का काम मैं कर लूंगा हम देखते हैं कि आखिर तक दीपक अपना प्रकाश फैला रहता है।

 जो व्यक्ति आपत्ति विपत्ति से घबराता नहीं है प्रतिकूलता के सामने झुकता नहीं और दुख को भी प्रगत की सीढ़ी बना लेता है उसकी सफलता निश्चित है ।

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इस जगत में सदैव मनचाही सफलता किसी को भी नहीं मिलती है लेकिन यह भी सत्य है कि किसी का पुरूषार्थ कभी निष्फल नहीं जाता है 
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