Devi devata ko pani wala nariyal chadhate hain kyun

1 क्या मंदिरों का बनाया जाना आवश्यक है ?
मंदिरों में हमें शांति मिलती है जिस का एकमात्र कारण है भावना ,मंदिर जाते समय हमारे मन में यह भावना होती है कि हम फला देवी या देवता के दर्शन करने जा रहे हैं वैसे तो लोग कह देते हैं कि मन चंगा तो कठौती में गंगा किंतु उनसे पूछा जाए कि आपका मन कितना चंगा है तो शायद इस उक्ति को कहने वाले जवाब नहीं दे पाएंगे ।
यह सत्य है कि मन पवित्र है तो पूजा किसी भी स्थान पर बैठकर की जा सकती है किंतु मंदिरों के अलावा अन्य स्थानों पर ध्यान केंद्रित करना अपेक्षाकृत कठिन होता है जबकि मंदिर में अपने इष्टदेव के ध्यान में मन एकागृ हो जाता है जिस का एकमात्र कारण है कि वहां देवी या देवता की प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति होती है तथा साथ में भावना की भी प्रभाव होती है अर्थात आपके मन में भावना भी वैसी ही होती है ।
हमारी भारतीय समाज में रात के समय झाड़ू नहीं लगाते है इसका क्या कारण है जानने के लिए नीचे का लिंक पढ़ें

रात को झाड़ू नहीं लगाना चाहिए क्यों


2-देवी-देवताओं को लोग अक्सर पानी वाला नारियल चढ़ाते हैं नारियल चढ़ाने से क्या होता है ?
हिंदू धर्म में नारियल का बहुत अधिक महत्व है एक तो प्रसाद रूप में नारियल से शुद्ध कोई प्रसाद नहीं होता क्योंकि इसका उपरी आवरण कठोर बंद होता है तथा अंदर स्वच्छ एवं शुद्ध जल भरा होता है हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जल के स्पर्श से वस्तुएं शुद्ध होती हैं जिसके कारण नारियल की गिरी पूर्णता शुद्ध होती है दूसरी बात है कि खुले में प्रसाद प्रदूषित हो सकते हैं किंतु नारियल का प्रसाद दूषित नहीं होता कारण स्पष्ट है ।


नारियल को सुख सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है शुभ विवाह लगन किसी को भेजते समय ,कलश स्थापना के समय ,घर की नींव डालते समय नारियल रखा जाता है कुछ लोग नारियल को भगवान शिव का स्वरूप भी मानते हैं क्योंकि उसमें तीन आंखें बनी होती हैं ।
 नारियल से शिक्षा भी मिलती है हर व्यक्ति को नारियल से शिक्षा लेनी चाहिए जिस तरह नारियल उपर से अत्यंत कठोर होता है उसी तरह इंसान को होना चाहिए भले ही उपर से कठोरता का आवरण धारण  किया हो किन्तु इन्सानियत का त्याग मत करो और भीतर से दयालु हो तो तुम्हें भी सभी लोग पूजनीय समझेंगे ।
हमारी भारतीय समाज में एक बहुत ही प्रचलित प्रथा देवी देवताओं को बलि देना है क्या बलि देना धार्मिक दृष्टि  से सही है इसकी अधिक जानकारी के लिए नीचे का लिंक  अवश्य पढ़ें

क्या देवी देवताओं को बलि चढ़ाना चाहिए

3-मंदिरों में घंटे क्यों लगाए जाते हैं ,?
मंदिर में घंटा लगे होने के कारण अनेक हैं प्रथम तो घंटे की ध्वनि सुनकर लोग जान जाते हैं कि मंदिर में प्रतिष्ठित देवी या देवता जो भी हो की आरती आरंभ हो चुकी है अतः जो आरती में सम्मिलित होने के इच्छुक हैं वह शीघ्रता से पहुंचे और जो नहीं पहुंच सकते वह जहां पर है वहीं पर खड़े होकर ध्यान करें घंटे लगाए जाने का दूसरा कारण यह भी है कि मंदिर में प्राण प्रतिष्ठित देवता भी जागृत हो जाएं अन्यथा जब आप उनके दर्शन के लिए जाते हैं हो सकता है वह उस समय समाधि में डूबे हैं और आपको पूजा प्रार्थना व्ययर्थ चली जाए घंटे की ध्वनि यदि लयबद्धता से की जाए तो कड़वी लगती है घंटे की ध्वनि से अनिष्टों का निवारण भी होता है पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जब प्रलय काल के बाद सृष्टि आरंभ हुई उस समय घंटे की ध्वनि के समान ही नाद हुआ था इस तरह मंदिर में घंटा लगाए जाने के अनेक कारण भी हैं ।
4-बेड या तख्त पर सोने से क्या होता है और चारपाई पर सोने से क्या होता है ---प्राचीन काल से ही ऋषि महर्षि लोगों को यह समझाते आ रहे हैं कि लकड़ी के बने  तख्त पर सोना लाभदायक है, किंतु लोग ऋषि-मुनियों की बात पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे, समझने का प्रयास नहीं करते थे कि व्रती उपवास करने वालों के लिए विशेष रूप से हिदायत देते थे कि व्रती आदमी को चारपाई पर सोना वर्जित है ।ऐसे लोग सिर्फ तख्त पर सोएं ।
प्रश्न उठता है कि पूजा पाठ या व्रत उपवास करने वाले व्यक्ति को ही तख्त पर सोना चाहिए या। हर किसी उपवाश करने वाले व्यक्ति को भी तख्त पर  सोना चाहिए । व्रती आदमी भोजन नहीं करता सिर्फ अल्पाहार फल जूस आदि लेता है ,पूरा भोजन ना करने से शक्तिहीनता का अनुभव होता है जिस कारण आलस अधिक आता है। आलस्य कम उत्पन्न हो इसके लिए तख्त पर सोना उत्तम है ।।चारपाई पर सोने से बहुत अधिक आलस्य आता है कारण है कि चारपाई ढीली-ढाली होती है और तुरंत ही शरीर को अधिक आराम मिलता है। आलस्य का यह एक कारण है ।
इसका एक वैज्ञानिक कारण भी है बेड याा तख्त पर सोने से रीढ की हड्डी सीधी होती है, रीढ़ की हड्डीमें दर्द नहीं होता, रीढ़ की हड्डी की कोई बीमारी नहीं होती ।हड्डी के बीच जो मज्जा होता है उसका संचार ठीक प्रकार से होता है ।
इस तरह तख्त पर सोने से ज्यादातर बीमारियों से बचाव होता है, जबकि चारपाई पर सोने से हड्डी में झुकाव आ जाता है जिस कारण अनेक प्रकार की बीमारियां  घेर लेती हैं। किसी किसी व्यक्ति के गले की हड्डी बढ़ जाती है जिससे ऑपरेशन तक की स्थिति बन जाती है।।
 अतः वैज्ञानिक दृष्टि से भी बेड या तख्त पर सोना उचित ही है ।।
प्रत्येक मनुष्य के जीवन में आने वाले कुछ परिस्थितियों के बारे में नीचे दिए गए लिंक में बताया गया है इसे अवश्य पढ़ें
मानव जीवन के 4 अनोखे सत्य

5---बेलपत्र में तीन दल होने का क्या अर्थ है----
 तीन दल तीन प्रमुख देवताओं ब्रह्मा, विष्णु ,महेश का द्योतक है ।3  दल लोकों को बताता है। बेलपत्र के तीन दल से तीन महा देवियों महालक्ष्मी ,महासरस्वती, महाकाली का ज्ञान होता है ।
महादेव शंकर जी के त्रिशूल में तीन फल होते हैं जिससे तीनों लोकों का संघार करने की शक्ति होती है ।तीन दल से तीन प्रमुख ऋतुओं सर्दी-गर्मी वर्षा अवस्था की श्रृंखला का पता चलता है ।देश की तीन पवित्र नदियां गंगा, यमुना ,सरस्वती भी हैं ।तीन दल होने का अनेक दृष्टांत मिलता है।
नाम का क्या अर्थ है नाम में सारी सृष्टि समाई हुई है नाम के बिना किसी भी वस्तु का अस्तित्व नहीं है चाहे वह सजीव हो अथवा निर्जीव आकाश पाताल मृत्युलोक या फिर देवी देवताओं की बात हो सभी के नाम हैं नाम से व्यक्ति विशेष का बोध होता है ।
बड़े-बड़े धर्म गुरु अपने शिष्यों को भवसागर यानी मोक्ष प्राप्ति के लिए नाम दान देते हैं जिसका नियमानुसार जप करना होता है ।
धरती के इंसान हो या अन्य जीव हर किसी के संबोधन के लिए नाम है यदि किसी को बुलाना हो तो उसके नाम से पुकारते हैं जिससे उस व्यक्ति को मालूम हो जाता है कि मुझे बुला रहे हैं ।अन्यथा हे, अरे यार ,सुनो भाई कहकर दूर से किसी को बुला रहे हो तो कोई तुम्हारे पास नहीं आएगा अर्थात व्यक्ति विशेष के संबोधन के लिए नाम का उपयोग करते हैं ।पूर्व काल में नाम रखने की क्रिया को नामकरण संस्कार कहते थे और लोग अपने बच्चों के नाम को देवी-देवताओं के नाम से मिलता जुलता नाम रखते थे जय श्री राम ,राधेश्याम, गिरजाशंकर ,बलदेव आदि।जिससे कि नाम का उच्चारण करने से जाने अनजाने में देवताओं के नाम भी सुमिरन हो जाएं
आज के अंक में बस इतना ही
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